मुख्यपृष्ठग्लैमर‘यह अनुभव दिलचस्प था!’ -रश्मिका मंदाना

‘यह अनुभव दिलचस्प था!’ -रश्मिका मंदाना

साउथ की चर्चित अभिनेत्रियों में से एक रश्मिका मंदाना ने फिल्म ‘एनिमल’ और ‘छावा’ की सफलता के बाद बॉलीवुड में अपना मकाम बना लिया है। हाल ही में विजय देवरकोंडा से सगाई करनेवाली रश्मिका की फिल्म ‘थामा’ जल्द ही रिलीज होने जा रही है। पेश है, रश्मिका मंदाना से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
ग्लैमर इंडस्ट्री में काम करनेवाले कलाकार जल्दी विवाह नहीं करते, लेकिन आपने इस ट्रेंड को गलत साबित कर दिया?
मेरी उम्र इतनी भी कम नहीं है, जितना आप समझ रही हैं। मैं २९ की हूं और इस उम्र में शादी कर लेनी चाहिए। मैंने खुद को प्रूव करनेवाली काफी फिल्में की हैं। रहा सवाल विवाह के बाद करियर जारी रखने का तो आजकल हर कोई अपना करियर बखूबी आगे बढ़ा रहा है, फिर चाहे वो माधुरी हों या आलिया भट्ट। विवाह अब करियर में बाधा नहीं रहा।

विजय देवरकोंडा और आप एक-दूसरे को कब से चाहते हैं?
मैं विजय के साथ फिल्म कर चुकी हूं, लेकिन इस समय हमारे रिश्ते के बारे में बात करना काफी पर्सनल हो जाएगा। वे बहुत अच्छे एक्टर हैं और उतने ही अच्छे इंसान भी। मैं इतना जरूर कह सकती हूं।

फिल्म ‘थामा’ में अपने किरदार के बारे में बताएंगी?
मैं ‘मैडॉक फिल्म्स’ की सभी फिल्में देख चुकी हूं। मुझे ‘स्त्री’, ‘भेड़िया’, ‘लुकाछिपी’ बहुत अच्छी लगीं। ‘थामा’ में मैं अपने किरदार के बारे में नहीं बता सकती, क्योंकि फिल्म की कहानी के बारे में बात करना मना है। खैर, यह एक दिलचस्प अनुभव था। मैं बस इतना कह सकती हूं।

अपनी पहली हिंदी फिल्म ‘मिशन मजनू’ से जुड़ी कोई यादें?
बॉलीवुड में ‘मिशन मजनू’ मेरी पहली रिलीज फिल्म थी, जिसमें मेरे को-स्टार थे सिद्धार्थ मल्होत्रा। सिद्धार्थ से मेरी दोस्ती नहीं हुई और इसकी एक मुख्य वजह यह थी कि मुझे तब तक बहुत अच्छी हिंदी नहीं आती थी। सिद्धार्थ का स्वभाव बहुत शांत है और वे जब भी सेट पर होते तो महसूस ही नहीं होता कि सेट पर कोई स्टार मौजूद है। खैर, इस फिल्म को असफलता का सामना करना पड़ा। इस फिल्म के लिए मुझे पहली बार घर से दूर रहना पड़ा था। मैं सोचती हूं कि इस फिल्म को असफलता मिली इस वजह से मेरे पैर जमीं पर रहे। पहली फिल्म के हिट होने पर मन कुछ ज्यादा ही उड़ने लगता है। इसलिए असफलता को मैं सफलता की पहली सीढ़ी मानती हूं। इस इंडस्ट्री में रहते हुए मैंने बहुत कुछ सीखा।

सुना है, आपको ऋषभ शेट्टी निर्देशित फिल्म ‘कांतारा चैप्टर-१’ का ऑफर मिला था?
‘कांतारा चैप्टर १’ का ऑफर मुझे नहीं मिला था, लेकिन मैंने ‘कांतारा चैप्टर-१’ देखी। यह फिल्म मनोरंजन का खजाना है और मुझे ये फिल्म बेहद अच्छी लगी। फिल्म की कहानी हमारे कर्नाटक की है। मैं खुद विराजपेट, कोडागु में रहती हूं। मेरी पढ़ाई कुर्ग में हुई और कॉलेज मैसूर में।

शूटिंग के सिलसिले में आपका मुंबई और कर्नाटक आना-जाना लगा रहता है। क्या आपको मुंबई की आदत हो गई?
मुंबई शहर से किसी विदेशी को भी अपनापन लग सकता है, फिर मैं तो इसी देश से हूं। एक अनकही ऊर्जा से भरा यह शहर कभी सुस्त नजर नहीं आता। मुझे मुंबई पसंद आने लगा है, लेकिन मेरा पूरा परिवार विराजपेट में रहता है। मैं उन्हें मुंबई में रहते हुए मिस करती हूं इसलिए जब शूटिंग आदि न हो तो मैं कर्नाटक जाना पसंद करती हूं। २०१६ में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘किरिक पार्टी’ से मेरा करियर शुरू हुआ और मैंने काफी फिल्में वहीं कीं इसलिए मुझे वहां की आदत पड़ गई।

आपके लिए फैशन के क्या मायने हैं?
मैं ज्यादा फैशनेबल नहीं हूं। घर पर मैं बिल्कुल भी मेकअप नहीं करती। मुझे वेस्टर्न कपड़ों से ज्यादा इंडियन परिधान अच्छे लगते हैं। मैंने फिल्म ‘छावा’ में नौ वारी साड़ी पहनने को बहुत एन्जॉय किया।

 

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