मुख्यपृष्ठस्तंभजीवन दर्पण : कुंभ विवाह करने से जीवन होगा सुखमय

जीवन दर्पण : कुंभ विवाह करने से जीवन होगा सुखमय

 डॉ. बालकृष्ण मिश्र

गुरुजी, मेरा विकास नहीं हो रहा है, उपाय बताएं?
– अनुराग राय
(जन्म- १८ जुलाई २०००, समय- दिन में ९ बजे, स्थान- आजमगढ़, उत्तर प्रदेश)
अनुराग जी, आपका जन्म मंगलवार के दिन श्रवण नक्षत्र में हुआ है। लग्न के आधार पर अगर हम देखें तो तो सिंह लग्न में आपका जन्म हुआ है और आपकी राशि मकर बन रही है। सिंह लग्न का स्वामी सूर्य आपकी कुंडली में १२वें भाव पर शुक्र और राहु के साथ बैठा है। लग्न भाव का स्वामी यदि १२वें भाव पर बैठता है तो करियर बनाने और जीवनसाथी का चयन करने में परेशानी आती है। आपकी कुंडली मांगलिक नहीं है, लेकिन १२वें भाव का स्वामी चंद्रमा आपकी कुंडली में छठे भाव पर केतु के साथ बैठा हुआ है और लग्न भाव का स्वामी सूर्य आपकी कुंडली में १२वें भाव पर बैठा है। इस कारण ग्रहण योग बना हुआ है। इस ग्रहण योग से शुभ फल प्राप्त करने के लिए आपको प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए और वैदिक विधि से ग्रहण योग की पूजा भी करना चाहिए। जीवन को विस्तारपूर्वक जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, क्या मेरी कुंडली मांगलिक है?
– अजय जे.पी. शर्मा
(जन्म- ७ जून १९९२, समय- रात्रि ११.२६ बजे, कांदिवली, मुंबई)
अजय जी, आपका जन्म रविवार के दिन पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में हुआ है। यदि लग्न के आधार पर हम बात करें तो मकर लग्न में आपका जन्म हुआ है और आपकी राशि सिंह बन रही है। आपकी कुंडली को अगर हम देखें तो चौथे स्थान पर मेष राशि पर मंगल बैठ करके आपकी कुंडली को मांगलिक बनाया है। मांगलिक होना वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार की असुविधा नहीं पैदा करेगा, क्योंकि मेष राशि का मंगल शुभ माना जाता है। यही मंगल आपके करियर को बहुत अच्छा बनाएगा, लेकिन विवाह होने से पहले आपको मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ एवं अर्क विवाह की विधि जरूर करवा लेना चाहिए। जीवन को विस्तारपूर्वक जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरुजी, मेरे विवाह में विलंब क्यों हो रहा है?
– आंचल विजय तिवारी
(जन्म- २४ जुलाई १९९९, समय- प्रात: ५.३५ बजे, स्थान- जौनपुर, उत्तर प्रदेश)
आंचल जी, आपका जन्म कर्क लग्न में हुआ है और आपकी कुंडली में चौथे स्थान पर मंगल बैठ करके आपकी कुंडली को मांगलिक बनाया है। लेकिन भाग्य भाव का स्वामी बृहस्पति दशम भाव पर बैठ करके अपनी पूर्ण सप्तम दृष्टि से मंगल को केंद्र में बैठ करके देख रहा है इसलिए मांगलिक दोष निष्क्रिय हो जाता है। विवाह में विलंब इसलिए हो रहा है, क्योंकि लग्न में ही सूर्य बैठा हुआ है और लग्न में सूर्य बैठने के कारण जीवनसाथी के चयन में परेशानियां आ रही हैं। आपको सूर्य का उपाय करना चाहिए। इसके लिए आपको प्रतिदिन सूर्य को प्रतिदिन अर्घ्य देना चाहिए और इसके साथ ही सूर्य को हर दिन प्रणाम करना चाहिए। १८ अक्टूबर से कर्क राशि में बृहस्पति आ जाने के बाद आप प्रयास करेंगी तो आपको अनुकूल जीवनसाथी मिल जाएगा। वैदिक विधि से आप मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ एवं कुंभ विवाह करवा लेंगी तो आपके लिए ज्यादा बेहतर होगा। जीवन को विस्तारपूर्वक जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

 

अन्य समाचार