मुख्यपृष्ठधर्म विशेषमहालक्ष्मी को पसंद है अच्छा और सच्चा घर

महालक्ष्मी को पसंद है अच्छा और सच्चा घर

शीतल अवस्थी

महालक्ष्मी की कृपा के बिना व्यक्ति किसी भी सुख-सुविधा को प्राप्त नहीं कर सकता है। देवी लक्ष्मी जहां निवास करती हैं वहां धन और अन्न की कमी नहीं रहती हैं। दीपावली का पर्व है और ऐसे समय में यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो महालक्ष्मी की कृपा आपके घर पर भी हो सकती है। देवी महालक्ष्मी का आशीर्वाद धन प्रदान करने वाला होता है। मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए पूजा-अर्चना के साथ-साथ हमारे घर का वातावरण भी शुद्ध रहना चाहिए। लक्ष्मी को कैसा वातावरण चाहिए? इस संबंध में देवी लक्ष्मी और देवराज इंद्र की एक कथा प्रचलित है। इस कथा में बताया गया है कि देवी लक्ष्मी किन लोगों के घरों में निवास करती हैं।
देवी लक्ष्मी और देवराज इंद्र की कथा
एक दिन महालक्ष्मी देवराज इंद्र के घर पहुंची और उन्होंने इंद्र से कहा, ‘हे इंद्र, मैं तुम्हारे यहां निवास करना चाहती हूं।’ इंद्र ने आश्चर्य से कहा, ‘हे देवी, आप तो असुरों के यहां बड़े आदरपूर्वक रहती हैं। वहां आपको कोई कष्ट भी नहीं है। मैंने पूर्व में आपसे कितनी बार निवेदन किया कि आप स्वर्ग पधारें परंतु आप नहीं आर्इं। आज आप बिन बुलाए कैसे यहां मेरे द्वार पर पधारी हैं? कृपया इसका कारण मुझे बताइएं।’ देवी लक्ष्मी ने प्रसन्नमुख से कहा, ‘हे इंद्र, कुछ समय पूर्व असुर भी धर्मात्मा थे, वे अपने सभी कर्तव्य पूर्ण रूप से निभाते थे। अब असुर अधार्मिक कृत्यों में लिप्त होते जा रहे हैं। अत: मैं अब वहां नहीं रह सकती।’ जिस स्थान पर प्रेम की जगह ईर्ष्या-द्वेष और क्रोध-कलह आ जाए, अधार्मिक, दुर्गुण और बुरे व्यसन (शराब, तंबाकु) आ जाए, वहां मैं नहीं रह सकती। मैंने सोचा कि दूषित वातावरण में मेरा निर्वाह नहीं हो सकता। इसलिए दुराचारी असुरों को छोड़कर मैं तुम्हारे यहां सदगुणों वाले स्थान पर रहने आई हूं।’ इंद्र ने पूछा, ‘हे देवी, वे और कौन-कौन से दोष हैं? जहां आप निवास नहीं करती हैं।’
लक्ष्मीजी ने कहा, ‘हे इंद्र, असुर बड़े दुराचारी हैं, जब कोई वृद्ध सत्पुरुष ज्ञान, विवेक और धर्म की बात करते हैं तो वे उनका उपहास करते हैं, उनकी निंदा करते हैं। यह कृत्य पूर्णत: अधार्मिक है। जो लोग गुरु, माता-पिता और बड़ों का सम्मान नहीं करते, मैं उनके यहां निवास नहीं करती। जो संतान अपने माता-पिता से मुंहजोरी करते हैं, उनका अनादर करते हैं, बिना वजह वाद-विवाद करते हैं, मैं ऐसे लोगों पर कृपा नहीं बरसाती। जो स्त्रियां अधार्मिक कृत्य करती हैं, परपुरुषों पर ध्यान लगाती हैं, उनके साथ सहवास करती हैं, अपनी सास और पति का आदर नहीं करती, मैं उनके यहां निवास नहीं करती। जिस घर में पाप, अधर्म, स्वार्थ रहता हैं देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त नहीं होता।
महालक्ष्मी ने कहा, ‘मैं वहीं निवास करती हूं जहां पूर्णत: धार्मिक आचरण रहता है। जिस घर के सभी सदस्य पवित्र मन वाले हैं, जो सभी को आदर-सम्मान देते हैं। जिस घर के सदस्य किसी को धोखा नहीं देते, मैं उनके यहां निवास करती हूं। जो व्यक्ति दूसरों की मदद करते हैं, गरीबों को दान देते हैं, अपना कार्य पूर्ण ईमानदारी से करते हैं देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करते हैं।’
शास्त्रों में सुखी जीवन के लिए कई प्रकार के नियम और सूत्र बताए गए हैं। इन्हीं सूत्रों में बताया गया है कि लक्ष्मी कृपा कैसे प्राप्त की जाए। पुराणों के अनुसार जिस घर में मूर्खों की पूजा नहीं होती है, जहां विद्वान लोगों का अपमान नहीं होता है बल्कि विद्वान और संत लोगों का उचित मान-सम्मान किया जाता है, वहां लक्ष्मीजी निवास करती हैं। जब व्यक्ति मूर्ख लोगों से दूर रहेगा तो उसके धन का अपव्यय रुक जाएगा और विद्वानों की संगति से उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगेगा। जिस घर में अन्न की सुरक्षा की जाती है। अन्न को व्यर्थ नहीं फेंका जाता है। थाली में जूठा अन्न नहीं छोड़ा जाता है, अन्न को भी देवी-देवताओं के समान पूजनीय माना जाता है, वहां लक्ष्मीजी निवास करती हैं। जब व्यक्ति अन्न की बचत करेगा तब स्वयं ही उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगेगा। जिन घरों में कलह होता है, लड़ाई-झगड़े होते हैं वहां देवी लक्ष्मी की कृपा नहीं होती है। महालक्ष्मी को शांत एवं स्वच्छ घर प्रिय हैं। जहां व्यर्थ किसी भी प्रकार का प्रदूषण होता है वहां देवी लक्ष्मी निवास नहीं करती हैं। अत: हमें भी अपने घर को एकदम साफ एवं शांत बनाए रखना चाहिए। परिवार में किसी भी प्रकार के वाद-विवाद नहीं होना चाहिए।

अन्य समाचार