राजन पारकर
बीड की धरती पर एक बार फिर राजनीति और जांच आमने-सामने खड़ी है। खबर है कि सांसद बजरंग सोनावणे के पुत्र सौरभ सोनावणे की एसआईटी द्वारा पूछताछ होगी। नाम आया तो हाजिरी भी लगानी पड़ी, क्योंकि लोकतंत्र में कुर्सी बड़ी हो सकती है, लेकिन कानून की कुर्सी उससे भी ऊंची होती है। राजनीति का पुराना खेल है, जब तक फूल बरसते हैं तब तक नेता मुस्कुराते हैं, लेकिन जब सवालों की बारिश शुरू होती है तो छतरी कानून की ही काम आती है। `सत्ता के महल में रहने वालों को यह भ्रम जल्दी हो जाता है कि दीवारें ऊंची हैं, मगर जांच की खिड़की हर जगह खुलती है!’ अब देखना यह है कि एसआईटी की कलम किस कहानी को सच मानती है और कौन-सी राजनीतिक पटकथा सिर्फ धुआं साबित होती है।
टैरिफ का तांडव?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर अपना पुराना हथियार निकाला, टैैरिफास्त्र! डिजिटल टैक्स लगाने वाले देशों को १०० फीसदी शुल्क की धमकी देकर उन्होंने दुनिया के व्यापार मंच को फिर गरमा दिया है। अमेरिका का कहना है कि हमारी कंपनियों पर कर मत लगाओ। बाकी देश कहते हैं, जहां कमाई होती है वहां टैक्स भी होगा। यानी डिजिटल युग में भी वही पुराना सवाल, पैसा किसका और हिस्सा किसका? वैसे किसी ने खूब कहा है `पहले तलवारों से साम्राज्य चलते थे, अब टैक्स की तलवार से व्यापारिक साम्राज्य हिलाए जाते हैं!’ दुनिया ग्लोबल विलेज बनने निकली थी, मगर अब हर देश अपनी-अपनी टैक्स की दीवार खड़ी कर रहा है।
गैलेक्सी से नई गैलेक्सी तक!
सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट छोड़कर नए घर में जाने की खबर ने बॉलीवुड में हलचल मचा दी है। वर्षों से जिस बालकनी से भाईजान हाथ हिलाते थे, अब वही `यादों का कोना’ इतिहास बन सकता है। गोलीबारी की घटना के बाद सुरक्षा चिंता बढ़ी और अब नया घर सिर्फ ऐशोआराम नहीं, बल्कि सुरक्षा का किला होगा। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि `फिल्मों में हीरो दुश्मनों को हराता है, लेकिन असली जिंदगी में हीरो को भी अपनी दीवारें मजबूत करनी पड़ती हैं!’ वैसे शोहरत जितनी ऊंची होती है, उतनी ही ऊंची सुरक्षा की दीवारें भी खड़ी करनी पड़ती हैं।
