प्रेम यादव / मीरा भायंदर
मीरा-भायंदर में मनपा (एमबीएमसी) की मालिकाना हक वाली जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी बिल्डर को बेचे जाने का गंभीर मामला सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के मनोज मयेकर ने इस संबंध में मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, मीरा रोड क्षेत्र में दो भूखंड—गांव भायंदर के सर्वे नंबर 541 (नई सर्वे नं. 44, हिस्सा नं. 1) की 1530 वर्गमीटर जमीन और गांव गोडदेव के सर्वे नंबर 384 (नई सर्वे नं. 62, हिस्सा नं. 2/B) की 1258 वर्गमीटर जमीन—मनपा के नाम दर्ज थीं। इन जमीनों को “कन्वेयंस डीड” और “पावर ऑफ अटॉर्नी” के माध्यम से जयपुर की कंपनी इलेवेशन प्रोजेक्ट्स एलएलपी को बेचा गया।
शिकायत में कहा गया है कि विक्रेता हनुमान सिंह मलाम चौहान और रघुवीर सिंह हनुमान सिंह चौहान (निवासी राजस्थान) ने खुद को जमीन का पावर ऑफ अटॉर्नी धारक बताते हुए यह सौदा किया। बताया गया है कि 2070 वर्गमीटर में से 1530 वर्गमीटर भूमि का टीडीआर पहले ही मनपा उठा चुकी थी और उसके बाद जमीन के 7/12 रिकॉर्ड में एमबीएमसी का नाम दर्ज था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सौदे की “कन्वेयंस डीड” मीरा-भायंदर के बजाय थाने के कलवा उपनिबंधक कार्यालय (दुय्यम निबंधक-९) में रजिस्टर्ड की गई। मयेकर ने सवाल उठाया है कि जब जमीन मनपा की थी तो निजी पक्ष के नाम कैसे रजिस्ट्री हो गई।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह सौदा मूल जमीन मालिक, बिल्डर और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया है। इसमें सार्वजनिक कल्याण के लिए आरक्षित जमीन को निजी बिल्डरों को सौंपा गया है। मयेकर ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले, रजिस्ट्री कराने वाले और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। यह प्रकरण मीरा-भायंदर में बड़े पैमाने पर जमीन घोटाले की ओर संकेत कर रहा है।
