ईश्वरी राज
-अरे भइया सुनो! राजनीति के गलियारों में जो खिचड़ी पक रही है, उसकी गरमागरम खबरें सीधे आपके लिए। पकोड़े गरम हैं ना तो चाय की चुस्की लो और सुनो…
बिहार की राजनीति में आजकल जुबानी तीर खूब चल रहे हैं। अभी-अभी डिप्टी सीएम से सीएम बने सम्राट चौधरी ने लालू प्रसाद यादव को ‘सबसे बड़ा खलनायक’ कह दिया, जिस पर मनोज झा और पूरी आरजेडी भड़क गई है कि हमारे ‘नायक’ को ऐसा वैâसे बोला! दूसरी तरफ, जेडीयू की नेशनल काउंसिल ने नीतीश कुमार को फिर से पार्टी अध्यक्ष तो चुन लिया है, लेकिन साथ ही उनके बेटे निशांत कुमार को पार्टी का ‘भविष्य’ घोषित कर दिया है। यानी, ‘लालटेन’ के बाद अब ‘तीर’ भी परिवार के हाथ में जाने की तैयारी में है! ‘बुझलऽ कि ना?’ अब देखना है कि ‘ई बबुआ’ राजनीति की पिच पर कितना लंबा टिकता है। कुछ तो पक रहा है!
‘ई बात में कतनो सच्चाई होखे’
इधर यूपी के अखिलेश यादव ने एक नया बम फोड़ा है। उनका दावा है कि बीजेपी जानबूझकर मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव के परिवार पर जमीन से जुड़े आरोपों को हवा दे रही है, ताकि एमपी और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को बदला जा सके! अब ‘ई बात में कतनो सच्चाई होखे’, लेकिन दिल्ली से जयपुर-भोपाल तक फुसफुसाहट तेज है। अरे भइया, अंदर ही अंदर कुछ तो पक रहा है!
भीतरखाने की सुगबुगाहट!
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ संगठन को और कसने में लगे हैं, ‘अरे भाई, रंगबाजी एकदम टाइट है!’ दिल्ली से आनेवाले हर बड़े नेता की हलचल पर लखनऊ की नजरें टिकी हैं कि अब कौन-सा नया दांव चलनेवाला है। वहीं उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी लगातार ब्यूरोक्रेसी को टाइट कर रहे हैं, लेकिन केदारनाथ उपचुनाव और अंदरूनी गुटबाजी की कानाफूसी देहरादून की वादियों में तैर रही है। ‘बल, द्वी दिन की निसाण छ!’ (यानी दो दिन की शांति है), अंदर ही अंदर नेता अपनी गोटियां सेट करने में जुटे हैं। भले यहां पानी बरस रहा है, लेकिन वहां तो भइया राजनीति का पारा ४५ डिग्री से भी ऊपर है! भाई वैसे, आपको क्या लगता है, नीतीश बाबू के बाद बिहार में निशांत कुमार टिक पाएंगे या ‘खेला हो जाई’?
लड़ाई पछै कर लीजो!
राजस्थान में भजनलाल शर्मा और पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बीच यमुना जल समझौते को लेकर महाभारत छिड़ गई है। गहलोत साहब कह रहे हैं कि ये सिर्फ ‘कागजी नौटंकी (faत्ो श्दळ)’ है, जमीन पर पानी लाकर दिखाओ। इस पर सीएम भजनलाल ने पलटवार किया है कि कांग्रेस को तो श्दA और श्दळ का फर्क ही समझ नहीं आता! ‘अरे भाईसाहब, अणै तो कांईं कवां’ पानी की एक-एक बूंद पर ऐसा घमासान मचा है कि जनता कह रही है,‘कदी तो म्हाने पानी पा दो, लड़ाई पछै कर लीजो!’
