सुरेश मिश्र
बिहार में विधानसभा चुनावों की रणभेरी बज चुकी है। नेताओं ने चौसर बिछाना शुरू कर दिया है। बैनर लगवाना हो, भीड़ जुटाना हो, वोट देना हो, सब के लिए भरपूर पैसे लुटाए जा रहे हैं। मुंबई में रहनेवाले पतिदेव को बिहार रहनेवाली पत्नी ने फोन किया कि घर आ जाइए। चुनाव का समय है, यहां भी खूब कमाई है। उसने कहा-
महंगाई से सब लाचार हो,
पिया कइ ला कमाई।
इहऊं मिले रोजगार हो,
पिया कइ ला कमाई।
निंदिया में सोवल रहल हर प्रशासन,
इक-दूसरे के बताइके दुशासन,
लागइ अब जागल सरकार हो
पिया कइ ला कमाई।
पुलिसन क लाठी अउ गुंडन क गोली,
नाचइं भ्रष्टाचारी कइके ठिठोली,
आजु कालि बदलल बिहार हो
पिया कइ ला कमाई।
घोषित भइल बाटइ जबसे चुनउवा
नेतए चलत हउवें रोज नवा दउंवा
गउवां भइल बा गुलजार हो
पिया कइ ला कमाई।
बैनर लगावइं जे भिड़िया जुटावइं
भोजन फ्री बाटइ, अउ ठर्रा भी पावइं
हर दिन रुपइया हजार हो
पिया कइ ला कमाई।
नेतए बहावइं पइसा जइसे पानी,
आवा मउज करबइ दुनहूं परानी,
गोड़वा धरी बार-बार हो
पिया कइ ला कमाई।
मुंबइ मा हर दिन घटत हउवे घटना,
मुंबइ म का बा चला आवा पटना,
बदलल जाई अब लिलार हो
पिया कइ ला कमाई।
इहऊं मिले रोजगार हो
पिया कइ ला कमाई।
