मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का : खाने वाला मिलावट नहीं देखता!

तड़का : खाने वाला मिलावट नहीं देखता!

कविता श्रीवास्तव

क्या खाने वाला कभी मिलावट और शुद्धता की पुष्टि करता है! इसके जवाब में बहुत ही कम लोग ‘हां’ कह सकते हैं क्योंकि जब प्लेट में कुछ लजीज सा मनपसंद व्यंजन परोसा जाता है या सामने आता तो लपलपाती जीभ कहां रुकती है। वह यह नहीं जानना चाहती है कि खाने में परोसी गई रोटी, सब्जी या चटनी में क्या मिला है? पनीर दूध से बना है या एनलॉग पनीर है? रसोईं में इस्तेमाल हो रही सामग्रियों की गुणवत्ता क्या है? उनमें कितनी चीजों की डेट एक्सपायर हो चुकी है? व्यंजनों को तैयार करने की जगह की हाइजीन क्या है? प्लेटों-बर्तनों आदि की साफ-सफाई वैâसे होती है? यह सब न कोई देखता है न इस बारे में कोई जानना चाहता है। भूख लगी हो तो बस कुछ भी मिल जाए, लोग चट कर ही जाते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो सड़क पर बिकने वाले चाट, सैंडविच, भेल, वड़ा-पाव, बर्गर, चाइनीज, साउथ इंडियन डिशेज से लेकर बड़े-बड़े मॉल्स और रेस्टोरेंट्स में परोसे जानेवाले तमाम देसी-विदेशी व्यंजनों पर लोग बड़ी संख्या में क्यों टूट पड़े दिखते? रेस्टोरेंट्स या शादी-ब्याह, जन्मदिन और एनिवर्सरी की पार्टियों में कुछ भी हो वह सलीके से परोसा जाना चाहिए। प्लेट की वस्तु जीभ को भा जाए तो लुत्फ उठाने की संतुष्टि हो जाती है। यही काफी है। हालांकि, यह सभी को पता है कि बाजार में मिलने वाले व्यंजनों के ठिकानों में बहुत ही कम ऐसे स्थान हैं, जहां हाइजीन और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। अमूमन यही देखा गया है कि जब कभी भी खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारी छापा मारते हैं तो बड़े-बड़े होटल, रेस्टोरेंट और नामी ब्रांड के प्रोडक्ट में भी प्रतिबंधित और आपत्तिजनक तत्व पाए जाते हैं। खाद्य सामग्रियों की कच्ची वस्तुएं रखने के ठिकानों पर जीव-जंतुओं की उपस्थिति भी पाई जाती है। कर्मचारियों के मेडिकल टेस्ट तो बहुत ही मुश्किल से उपलब्ध होंगे। छापे पर कुछ कार्रवाई और कुछ दंड लगाने के बाद फिर यथावत चलता रहता है। यह बात इसलिए चिंताजनक है क्योंकि मुंबई में एक-दो नहीं, डेढ़ करोड़ की जनता निवास करती है और लाखों लोग रोजाना बाहर खाना खाते और जमकर नाश्ता आदि करते रहते हैं। मुंबई में लगभग हर सड़क पर ठेले व खोमचों पर व्यंजन बिकते दिखते हैं। साथ ही हर जगह होटल-रेस्टोरेंट भी हैं। लेकिन इनकी जांच के लिए खाद्य और प्रशासन विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है। यह बात बहुत बड़ी चिंता का विषय है। इन दिनों मिठाइयों का कारोबार करोड़ों में है क्योंकि दिवाली सिर पर है। हर घर में, हर दफ्तर में मिठाई आएगी। ऐसे में मिलावटखोर और मुनाफाखोर भी खूब सक्रिय रहेंगे। अपनी सीमित क्षमता में एफडीए के अधिकारी सक्रिय हैं, लेकिन हमें भी सतर्क रहना होगा।

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