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गयाजी के टेंपो-टोटो चालक ठेकेदारी, रंगदारी और संघ के नाम पर प्रतिदिन सैकड़ों रुपये की वसूली से त्राहि-त्राहि : कांग्रेस

अनिल मिश्र / पटना

बिहार की धार्मिक, आध्यात्मिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक नगरी गयाजी को एक तरह से बिहार की पर्यटन राजधानी भी कहा जा सकता है। गयाजी में जहां भगवान विष्णु का चरण गयासुर के शरीर पर स्थित है, वहीं भस्मकूट पर्वत पर स्थित इक्यावन शक्तिपीठों में से एक मां मंगलागौरी सिद्धपीठ है, जहां मां का वक्षस्थल गिरा था। वहीं बोधगया में राजकुमार सिद्धार्थ ने ज्ञान प्राप्त कर पूरे विश्व को बौद्ध धर्म की सौगात दी। इसके अलावा गया में करीब दो सौ वर्ष पुराना चर्च, दरगाह तथा जैन धर्म से जुड़े धार्मिक स्थल भी हैं, जहां वर्षभर श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।
नेताओं का कहना है कि गयाजी शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले टेंपो-टोटो से हजारों गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों का आवागमन होता है, लेकिन इन वाहनों के चालकों को गया नगर निगम, गयाजी रेलवे स्टेशन, चालक संघ तथा अन्य माध्यमों से कथित ठेकेदारी और रंगदारी के नाम पर प्रतिदिन सैकड़ों रुपये देने पड़ते हैं। इससे चालक त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। उनका आरोप है कि राज्य सरकार एवं स्थानीय प्रशासन से ठेकेदारी व्यवस्था में सुधार तथा संघ के नाम पर होने वाली प्रतिदिन की वसूली को संघ के बैंक खाते में जमा कराने की पुरानी मांग की लगातार अनदेखी की जा रही है।
इस संबंध में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, दामोदर गोस्वामी, टिंकू गिरी, विपिन बिहारी सिन्हा, विशाल कुमार, सुनील कुमार पासवान, श्रावण यादव और कृष्णा कानू आदि ने कहा कि गयाजी में संचालित हजारों टेंपो-टोटो से मानपुर गोपालगंज रोड, चौक, पंचायती अखाड़ा, दिग्घी तालाब, सिकरिया मोड़, स्टेशन, चंदौती मोड़, मेडिकल कॉलेज आदि स्थानों पर गया नगर निगम की ठेकेदारी के साथ-साथ टेंपो चालक संघ के नाम पर प्रतिदिन 150 से 200 रुपये तक वसूले जाते हैं। उनका कहना है कि शिक्षित बेरोजगार चालकों की कुल कमाई का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा ठेकेदारी में चला जाना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है।
नेताओं ने कहा कि गया नगर निगम के अधीन शहर में केवल चौक और दिग्घी तालाब ही टेंपो स्टैंड हैं, जबकि पंचायती अखाड़ा, सिकरिया मोड़ और मुफस्सिल मोड़ बस स्टैंड हैं। ऐसे में बस स्टैंडों पर टेंपो से ठेकेदारी नहीं ली जानी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि पहले की हाथ रिक्शा व्यवस्था की तर्ज पर अब ई-रिक्शा (टोटो), जो गली-गली और घर-घर तक चलते हैं, उनसे अलग-अलग स्थानों पर ठेकेदारी लेने के बजाय पूर्व की तरह 300 रुपये मासिक का एकमुश्त पास जारी किया जाए। साथ ही, केवल रेलवे स्टेशन पर ही ठेकेदारी ली जाए, जैसा कि राजधानी पटना में व्यवस्था है।
नेताओं ने मांग की कि टेंपो-ई-रिक्शा चालक संघ का सरकारी पंजीकरण कराया जाए तथा प्रतिदिन प्राप्त होने वाली राशि संघ के बैंक खाते में जमा हो। इस राशि का उपयोग दुर्घटनाग्रस्त, बीमार अथवा अन्य जरूरतमंद सदस्यों की सहायता के लिए किया जाए, ताकि संघ के नाम पर वसूली गई राशि के दुरुपयोग अथवा हड़पने की परंपरा समाप्त हो सके। साथ ही, गयाजी जिला टेंपो-ई-रिक्शा चालक संघ के साथियों से चट्टानी एकता बनाए रखते हुए राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन एवं संघ के समक्ष न्याय की मांग करने का आह्वान किया गया।

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