मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
योगी कैबिनेट ने प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों का वर्ष 2026 का तृतीय सत्र 3 अगस्त से आहूत किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आगामी सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट, अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक तथा अन्य महत्वपूर्ण विधायी कार्य संपादित किए जाएंगे। इसके अलावा संभल हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जाएगी।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि राज्य विधानमंडल का द्वितीय सत्र 30 अप्रैल को आहूत किया गया था। उसी दिन विधानसभा एवं विधान परिषद की बैठक समाप्त होने के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद 7 मई 2026 को सत्रावसान कर दिया गया था। संविधान के अनुच्छेद-174 तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य-संचालन नियमावली के अनुसार विधानमंडल के दो सत्रों के बीच छह माह से अधिक का अंतर नहीं हो सकता। इसी संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप आगामी सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया है।
आगामी सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक अनुदानों की मांगें विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी। इसके अलावा विगत सत्रावसान के बाद शासन के महत्वपूर्ण निर्णयों के क्रियान्वयन के लिए प्रख्यापित अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक भी सदन में प्रस्तुत कर पारित कराए जाएंगे। साथ ही अन्य आवश्यक विधायी एवं शासकीय कार्य भी संपादित किए जाएंगे।
सत्र के दौरान संभल में 24 नवंबर 2024 को भड़की हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाएगी। न्यायिक जांच आयोग ने बीते वर्ष 28 अगस्त को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी थी। अब कैबिनेट ने इसे सदन में पेश करने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सुनियोजित तरीके से संभल की जनसांख्यिकी बदलने की साजिश का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, आजादी के समय संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत थी, जो घटकर लगभग 15 प्रतिशत रह गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बदलाव लगातार हुई हिंसा, पलायन और हत्याओं के कारण हुआ। इसमें दंगों, लव जिहाद और धर्मांतरण का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुओं की आबादी 20 प्रतिशत से कम होने के बाद संभल में विदेशी और देसी मुसलमानों के बीच संघर्ष शुरू हुआ। तुर्क और धर्मांतरण के बाद मुस्लिम बने पठानों के बीच विवाद का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में बीते सात दशकों के दौरान हुए 15 दंगों का जिक्र है। साथ ही संभल के 68 तीर्थस्थलों और 19 पावन कूपों पर कब्जे का उल्लेख किया गया है। हरिहर मंदिर से जुड़े बाबरकालीन साक्ष्यों का भी हवाला दिया गया है। इसके अलावा कई आतंकी संगठनों की सक्रियता, विशेष रूप से आसिम उर्फ सना-उल-हक का उल्लेख किया गया है, जिसे अमेरिका आतंकवादी घोषित कर चुका है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संभल में अवैध हथियारों और मादक पदार्थों का कारोबार तेजी से बढ़ा है।
उधर, विपक्ष अयोध्या स्थित श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्ष का कहना है कि मंदिर के प्रबंधन में विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों की भूमिका रही है। विपक्ष चढ़ावा चोरी के आरोपियों के संबंधों का खुलासा करने की मांग करेगा। विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री जिस शहर का औसतन हर महीने दौरा करते हैं, वह भी सुरक्षित नहीं है। विपक्ष का यह भी कहना है कि जिन भगवान श्रीराम को भाजपा अपना प्रमुख प्रतीक मानती रही है, उन्हीं का मंदिर सुरक्षित नहीं रह सका।
