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भाजपा ने की मुंबईकरों की दिवाली काली! …सड़कें बदहाल, रोजगार मुहाल, महंगाई विकराल, जनता बेहाल

द्रुप्ति झा / मुंबई
मोदी सरकार में महंगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता ही जा रही है। त्योहारी सीजन की शुरुआत होते ही महंगाई डायन मानो आम आदमी के सिर पर तांडव कर रही है। आम आदमी की जेब पर महंगाई का बोझ इतना बढ़ गया है कि उसकी दिवाली काली हो गई। मुंबई जैसे शहर में सड़कें बदहाल हैं, लोगों को रोजगार मुहाल हो गया है। दिनों-दिन विकराल होती महंगाई से जनता बेहाल है, लेकिन केंद्र की मोदी और राज्य की महायुति सरकार महंगाई को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे में अब सवाल उठता है कि भाजपा सरकार में मंत्री उनके नेता जनता के धैर्य की कब तक परीक्षा लेंगे।

बता दें कि भाजपा राज में लोगों की आय कम हुई और खर्चा काफी ज्यादा बढ़ा है। ऐसे में मध्यमवर्गीय परिवार की आर्थिक स्थिति और चरमरा गई है। सब्जी से लेकर राशन, दूध आदि सामानों की महंगाई की वजह से घर चलाना लोगों के लिए अब मुश्किल हो चुका है। सबसे बुरी परिस्थितियों से वो लोग लड़ रहे हैं, जिनके पास डिग्री होते हुए भी रोजगार नहीं है। सरकार ने लोगों को रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन सारे दावे खोखले निकले। युवा बेरोजगारी के कारण आर्थिक तंगी से आज भी जूझ रहे हैं। महंगाई और बेरोजगारी से परेशान लोग अपनी जिंदगी तक खत्म कर रहे हैं, लेकिन सरकार अपनी मस्ती में है।
सड़कों की हालत भी खराब
मुंबई जैसे मेट्रोपोलिटन शहर में सड़कों की हालात भी खराब है। सड़कें गढ्ढों से पटी पड़ी हैं। गड्ढों के कारण सड़क हादसों में लोग जान गंवा रहे हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इन्हीं सब समस्याओं की वजह से मुंबईकरों की दिवाली काली हो चुकी है। फुटकर सब्जी विक्रेताओं ने त्योहारों में खपत बढ़ने का फायदा उठाते हुए सब्जियों के दाम कई गुना बढ़ा दिए हैं, जिससे रसोई का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है। मुनाफाखोरों ने खुदरा महंगाई को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। शहर के बाजारों में सब्जियों के दाम में अप्रत्याशित उछाल देखने को मिल रहा है।

सड़कों के गड्ढों से पहले ही मुंबईकर परेशान!
खाज में खुजली साबित हो रहा ट्रैफिक जाम

कहते हैं सिर मुड़ाते ही ओले पड़े। यह कहावत भी महायुति सरकार की मेहरबानी से मुंबईकरों पर सटीक बैठ रही है, क्योंकि मुंबईकर पहले से ही सड़कों के गड्ढों से परेशान हैं, ऊपर से घर से निकलने के बाद यातायात जाम से सामना होता है। १० मिनट का रास्ता तय करने में १ घंटे का समय दुखदाई बन जाता है। शहर की सड़कों पर गढ्ढों की वजह से गाड़ियों की लंबी लाइन लग रही है। लोग परेशान हैं, खास करके शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में आए दिन लगने वाले जाम से महिलाएं व्यथित हैं। जब भी वह कामकाज के लिए घर से निकलती हैं तो उनका अधिकांश समय इस जाम के झाम में ही बेकार हो जाता है। महिलाओं का कहना है कि अब तो त्योहारी सीजन है, लेकिन सामान्य दिनों में भी जाम की समस्या बढ़ती जा रही है। दूसरी ओर भाजपा राज में आवश्यक सब्जियों के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। जो आलू कुछ ही समय पहले २५ रुपए प्रति किलो बिक रहा था, वह अचानक बढ़कर ३० रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। फूलगोभी के रेट में सर्वाधिक उछाल आया है। ३५ से ४० रुपए प्रति किलो बिकने वाली फूलगोभी अब ७५ से-८० रुपए प्रति किलो तक बिक रही है। पत्ता गोभी भी ४० रुपए प्रति किलो से बढ़कर ५०-६० रुपए प्रति किलो के भाव पर आ गई है। हरी सब्जियों में पालक भी ३० से उछलकर ४०-५० प्रति किलो पर पहुंच गया है। खीरा २० से ३० और टमाटर ४० से ४५-५० रुपए प्रति किलो मिल रहा है। अन्य सभी प्रकार की सब्जियों के भाव भी आसमान छू रहे हैं। सब्जियों की कीमतों में इस बेतहाशा वृद्धि से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों का मासिक बजट बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गृहणियों के लिए रसोई चलाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। वह अब कम मात्रा में सब्जियां खरीद रही हैं और कई जरूरी सब्जियों को थाली से बाहर करने पर मजबूर हो गई हैं।

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