सामना संवाददाता / मुंबई
मालिकाना हक का घर पाने की लंबे समय से मांग कर रहे पुलिसकर्मियों को सरकार से बड़ा झटका लगा है। कल गृह विभाग की ओर से जारी किए गए जीआर में मालिकाना हक से घर देने का कोई उल्लेख नहीं है। जबकि सीएम देवेंद्र फडणवीस कई बार मंच से बोल चुके हैं कि पुलिस को उनके हक का घर मिलेगा। सरकार के इस जीआर से साफ झलक रहा है कि सरकार ने पुलिस वालों के साथ भी ठगी की है। इससे ‘पुलिस हाउसिंग टाउनशिप प्रोजेक्ट’ के तहत अपने घर का सपना देख रहे पुलिसकर्मियों का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है।
गौरतलब है कि ‘पुलिस वालों को उनका घर देंगे’ ऐसा दावा करने वाली सत्ता पक्ष की सरकार का आश्वासन आखिरकार खोखला साबित हुआ है, इस पर पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों ने तीव्र नाराजगी जताई है।
बता दें कि मुंबई में बढ़ती आबादी और सुरक्षा की जिम्मेदारियों को देखते हुए, पुलिस बल के लिए निवास स्थानों की संख्या बढ़ाकर पुलिस कॉलोनियों का पुनर्विकास करना और पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए सुसज्ज कॉलोनियां बनाना आवश्यक है। यह प्रोजेक्ट मुंबई में ही बनाया जाएगा। इससे पुलिस बल अधिक दक्षता और तेजी से कानून और व्यवस्था बनाए रखने का कार्य कर सकेगा। इस उद्देश्य से मुंबई में पुलिस के लिए ‘पुलिस हाउसिंग प्रोजेक्ट’ को मूर्त रूप देना आवश्यक है, लेकिन इस योजना के तहत पुलिस वालों को जो घर मिलेगा, वह उनके मालिकाना हक वाला नहीं होगा।
‘महायुति’ का यूटर्न
इस जीआर से साफ है कि महायुति सरकार ने वादा पूरा नहीं किया और इस मामले में उसने यूटर्न ले लिया है। फडणवीस ने पुलिस वालों से वादा किया था कि उन्हें उनके मालिकाना हक वाला घर मिलेगा। पुलिस वालों की मांग थी कि जैसे मिल मजदूरों को घर मिल रहा है, उसी तर्ज पर हम पुलिस वालों को भी घर मिलना चाहिए।
