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शिंदे गुट के विधायक का उल्टा पड़ा दांव! …एफडीए से मिली विधायक निवास की कैंटीन को ‘क्लीन चिट’, ‘घटिया खाना’ बताकर की थी मारपीट

सामना संवाददाता / मुंबई
शिंदे गुट के विधायक संजय गायकवाड़ का ‘घटिया खाना’ वाला हंगामा अब उन्हीं पर उल्टा पड़ गया है। मानसून सत्र के दौरान विधायक निवास की कैंटीन में खराब भोजन का आरोप लगाकर उन्होंने न केवल जोरदार हंगामा किया, बल्कि कैंटीन संचालक के साथ मारपीट भी की थी। इस दबाव के बाद तुरंत कैंटीन का लाइसेंस रद्द कर दिया गया और संस्था की साख पर दाग लगा। लेकिन अब एफडीए की जांच रिपोर्ट ने सबकुछ साफ कर दिया है कि कैंटीन में कोई खराब या घटिया खाद्य सामग्री नहीं मिली। एक महीने के भीतर ही कैंटीन को ‘क्लीन चिट’ दे दी गई है और उसका लाइसेंस फिर से बहाल होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नतीजतन विधायक का हंगामा बेकार गया और कैंटीन की बदनामी मुफ्त में हो गई।
उल्लेखनीय है कि यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था, जब विधायक निवास की कैंटीन में कथित तौर पर बासी खाना दिए जाने पर बुलढाणा के विधायक संजय गायकवाड़ ने वहां हंगामा कर कैंटीन संचालक को पीट दिया था। मानसून सत्र में यह मुद्दा खासा गरमाया था। घटना के बाद कैंटीन का संचालन अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया था और उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। लेकिन अब सिर्फ एक महीने में ही जांच के बाद कैंटीन को क्लीन चिट दी गई है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कैंटीन में किसी भी तरह के अवैध या खराब खाद्य पदार्थ नहीं पाए गए। इसके बाद अब इस बात की चर्चा है कि विधायक ने बेवजह हंगामा कर कैंटीन की प्रतिष्ठा को बदनाम किया।

संवेदनशील मुद्दों से ज्यादा तमाशे में दिलचस्पी रखते हैं सत्ताधारी
विपक्ष ने इस पूरे मामले को लेकर शिंदे गुट और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सत्ता में बैठे लोग संवेदनशील मुद्दों से ज्यादा तमाशे में दिलचस्पी रखते हैं। विधायक निवास की वैंâटीन को सियासी अखाड़ा बनाने के बाद अब जब एफडीए ने वैंâटीन को क्लीन चिट दे दी है तो जनता सरकार की नीयत पर शक कर रही है।

महायुति में पैदा हुई असहज स्थिति
विधायक गायकवाड़ का वैंâटीन विवाद अब महायुति सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर गया है। जिस कैंटीन पर घटिया भोजन का आरोप लगाकर उन्होंने हंगामा किया था, वही अब एफडीए की जांच में निर्दोष साबित हुई है। विधानसभा में इस मुद्दे पर खूब बयानबाजी और नाटक चला, पर अंत में सरकारी एफडीए ने साफ कहा कि वैंâटीन में न तो खराब खाना और न कोई नियम उल्लंघन किया गया था। विपक्ष ने इस पर तंज कसते हुए कहा है कि भूख तो विधायक की थी, पर बदनामी वैंâटीन की हो गई।

 

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