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महायुति में ‘महा’ संघर्ष की आहट … ठाणे मनपा चुनाव में आमने-सामने भिड़ेंगे भाजपा-शिंदे गुट!

फडणवीस के संकेत से शिंदे गुट में मची खलबली

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
ठाणे की चालबाज राजनीति के कारण महायुति भीतर से पूरी तरह हिलती हुई दिखाई दे रही है। मनपा और नपा चुनावों के मद्देनजर भाजपा और शिंदे गुट दोनों अपने-अपने दम पर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। फडणवीस के हालिया संकेतों ने शिंदे गुट की बेचैनी और बढ़ा दी है। खासकर, उस ठाणे में जिसे एकनाथ शिंदे का अभेद्य गढ़ माना जाता है। ऐसे में शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं में डर और असंतोष का माहौल घर कर गया है कि भाजपा धीरे-धीरे संगठन पर कब्जा मजबूत कर रही है। इसी बीच आनंद आश्रम में हुई बैठक ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी, जहां नाराज पूर्व नगरसेवकों के भाजपा विरोधी सुर खुलकर गूंज उठे। इन सभी राजनीतिक हलचलों से स्पष्ट नजर आ रहा है कि चुनाव से पहले ही ठाणे की सड़कों पर महायुति में ‘महा संघर्ष’ का नया अध्याय शुरू हो सकता है।
आनंद आश्रम में सांसद नरेश म्हस्के की मौजूदगी में ठाणे शिंदे गुट के पूर्व नगरसेवकों और पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक मनपा चुनाव की प्रारंभिक तैयारी के लिए बुलाई गई थी, लेकिन इसका माहौल तेजी से भाजपा-विरोधी होता गया। बैठक में कई नगरसेवकों ने आरोप लगाया कि भाजपा ठाणे में विकास कार्यों में अड़चनें डाल रही है। कुछ पदाधिकारियों ने साफ कहा कि भाजपा नेता ठाणे के प्रोजेक्ट्स में हस्तक्षेप कर रहे हैं और उनके गुट का श्रेय छीनने की कोशिश कर रहे हैं। इन पदाधिकारियों ने मांग की कि मनपा में शिंदे गुट को ही प्रभुत्व बनाए रखना चाहिए। सांसद म्हस्के ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन नाराज पदाधिकारियों ने साफ कहा कि अब स्वबल पर लड़ना ही एकमात्र रास्ता है।

नई मुंबई में भी गहरी हो रहीं हैं दरारें
ठाणे के साथ-साथ नई मुंबई में भी महायुति के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। हाल ही में हुई एक बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की मौजूदगी में स्थानीय नेताओं ने स्पष्ट कहा कि नई मुंबई मनपा में महापौर भाजपा का होना चाहिए। बैठक में यह भी कहा गया कि महायुति को जारी रखना है या नहीं, इसका पैâसला स्थानीय नेताओं को ही करना है। इस बीच फडणवीस ने संकेतों में यह राय रखी कि नई मुंबई जैसे बड़े शहरों में भाजपा को नेतृत्व संभालना चाहिए।

ठाणे में पकड़ मजबूत कर रही भाजपा
पिछले कुछ महीनों से भाजपा ठाणे मनपा में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पूर्व नगरसेवकों से संपर्क अभियान, प्रभाग स्तर पर नए प्रोजेक्ट्स में सक्रियता और विकास कार्यों पर अपनी छाप छोड़ने के प्रयास जारी हैं। इन कदमों ने शिंदे गुट के अंदर बेचैनी बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शिंदे गुट और भाजपा का रिश्ता सत्ता तक सीमित है। स्थानीय स्तर पर दोनों के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा चरम पर पहुंच चुकी है। ठाणे भले ही शिंदे का अभेद्य गढ़ माना जाता हो, लेकिन भाजपा यहां अपनी जड़ें गहराई तक ले जा रही है। भाजपा ने ठाणे, नई मुंबई और कल्याण-डोंबिवली जैसे महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्रों में स्वबल की तैयारी शुरू कर दी है।

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