बॉलीवुड में अभिनेत्री हेमा मालिनी को उनकी डेब्यू फिल्म से ही ड्रीम गर्ल का खिताब उनकी असाधारण सुंदरता के कारण मिला। इस समय यह स्वप्नसुंदरी ७७ वर्षीय हैं, लेकिन उम्र तो उनके लिए महज एक नंबर है। हेमा इस समय सुर्खियों में हैं। हेमा ने उनके फिल्म करियर के ६ दशक पूरे ६० साल सफलतापूर्वक पूरे किये हैं। हेमा ने अपना हर रूप बेहद संजीदगी के साथ जिया है। एक आदर्श मां, पत्नी, बेटी, अभिनेत्री, संसद, डांसर, नानी, एक सह कलाकार, एक निर्माती, निर्देशिका। हेमा के ६० वर्षों का जश्न मनाने एक शानदार कार्यक्रम मुंबई के षणमुखानंद हॉल में आर जे अनिरुद्ध ने पेश किया, जिसमें हेमा के कई सह कलाकार, गायक, संगीतकारों ने भाग लिया। हेमा से एक दिलचस्प मुलाकात उस प्रोग्राम के बाद हुई। स्वप्न सुंदरी हेमा मालिनी और पूजा सामंत की बातचीत के कुछ अंश-
हेमा, आपके करियर के ६० वर्ष पूरे हुए। कैसा महसूस करती हैं आप इस उपलब्धि को लेकर?
– यह ६ दशक कैसे बीते यह मुझे आज तक पता नहीं चला। जीवन की हर सुबह एक नया दिन, एक नयी शुरुवात होती रही है। कभी किसी भी बात का तनाव नहीं महसूस हुआ। हर चुनौती को स्वीकारती गयी। मेरे जीवन में अब सबसे अधिक कमी मुझे महसूस होती है धरम जी की। उनके बिना हर दिन एक साल लगता है। मैंने उनके साथ ४५ फिल्में की है। मेरा करियर उनके बिना अधूरा है। मैं मेरे सभी मेकर, निर्माता, को-आर्टिस्ट्स, गायिका, संगीतकार, प्रोडक्शन टीम की शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मेरे करियर को आगे बढ़ाया, मेरे ६ दशक पूरे करवाने में मेरी मदद की। सभी का योगदान रहा है मुझे यहां तक लाने में।
अक्सर सुना है कि आप अभिनय से ज्यादा डांस को अहमियत देती हैं। इसमें क्या सच्चाई है?
– डांस मेरा पैशन है। अभिनय से मेरा घर चला। मैं अब अभिनय ना भी करूं तो मैं जी सकती हूं, लेकिन बिना नृत्य तो मेरा दम घुट जाएगा। नृत्य मेरी सांसे हैं, मेरा अस्तिस्त्व है। जब अम्मा (जया चक्रवर्ती-मां) जब मुझे डांस सीखना चाहती थी तो मैं बड़ी बोअर हो जाती थी। लगता था कि मेरे खेलने के समय क्या अम्मी मुझे डांस करने के लिए परेशान कर रही हैं! उस दौर हम दिल्ली में रहते थे। साउथ के हर घर इ लड़कियां उनके बचपन से डांस सीखती हैं। क्लासिकल डांस सीखना उतना ही कॉमन है, जितना सास लेना। यह हमारी सभ्यता है। मैं ७ साल की उम्र से डांस सीख रही हूं, उस उम्र में मेरे लिए डांस एक अम्मा (मां-जया चक्रवर्ती) द्वारा दी पनिशमेंट लगती थी, हम तब दिल्ली में रहते थे। वक्त के साथ मुझे क्लासिकल डांस-भरत नाट्यम में रुझान पैदा हुआ और मैं इसमें पारंगत हुई। अब डांस मेरी जिंदगी और मेरा अटूट हिस्सा है, डांस से मैं अलग नहीं हो सकती। मैंने देश और दुनिया में कई देवी-देवताओं पर आधारित रचनात्मक नृत्य नाटिकाएं प्रस्तुत की हैं, जिसमें द्रौपदी, सीता, मीरा, दुर्गा जैसे कई बैले बहुत पसंद किये गए हैं।
आप अपनी व्यक्तिगत जिंदगी में नानी बनी हैं, अभिनय में लगातार सक्रिय, राजनीति में सक्रिय, कहां-कैसे इतनी ऊर्जा लाती हैं आप?
-उम्र तो बस एक नंबर है, न कि मेरे लिए, बल्कि सभी के लिए। अगर आपमें सकारात्मक जज्बा है, जिंदगी जीने के ललक है तो आप हर उम्र में काम कर सकते हैं, लेकिन इसके साथ आपको कोई फिजिकल फिटनेस के लिए कसरत, उचित आहार की जरूरत है। मुझे हर दम चुस्त-फुर्त डांस ने रखा है। जिंदगी के प्रति मेरा नजरिया हमेशा पॉजिटिव रहा है। मेरी डिक्शनरी में नो शब्द के लिए कोई जगह नहीं है। भगवान के प्रति आस्था, भक्ति, परिवार से जुड़ाव, मेरे डांस, अभिनय और मथुरा में मेरी कोंस्टीटुंसी में मेरे आम जनता के लिए करनेवाले कार्य में मैं लीन रहती हूं।’
कैसा रिश्ता है आपका और आपकी बेटियों का?
– एशा और आहना मेरे दो नयन हैं, मेरी हार्ट बीट्स हैं। जिस तरह आज जो हेमा मालिनी दुनिया के सामने हैं, उसे बनाने में मेरी मां जया चक्रवर्ती थीं। मैंने अपनी बेटियों को एक अच्छी परवरिश दी, जब एहसास हुआ कि मेरी छोटी बेटी आहना बहुत शर्मीली है तो मैंने उसे इंडस्ट्री में आने के लिए कोई फोर्स नहीं किया। धरम जी नहीं चाहते थे कि एशा या आहना को इंस्डट्री में करियर बनाने का मौका देना चाहिए, लेकिन एशा अभिनय में ही आना चाहती थी तो धरम जी को मैंने समझाया और एशा को अभिनय में आने के लिए धरम जी से इजाजत पायी। मुझे एशा और आहना के डांस स्किल्स पर बहुत फख्र महसूस होता है। दोनों बेटियां अपनी जिंदगी में खुश हैं, एशा इन दिनों ओटीटी प्लेटफार्म पर व्यस्त है।
‘काफी दिनों से आपको बड़े पर्दे पर देखा नहीं? क्या अभिनय को मिस करती हैं आप?
-जी हां, मेरी पहचान एक अभिनेत्री के रूप में पुख्ता है, वो कैसे मिट सकती है? मैंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए काफी काम किया है और कर भी रही हूं। मथुरा -दिल्ली-मुंबई मेरा आना-जाना लगा रहता है। इसलिए फिल्म प्रपोजल पर ध्यान रहा नहीं। मैं तो इंतजार कर रही हूं कि कोई मेकर मुझे सशक्त किरदार ऑफर करे, जिसे निभाने में मुझे गर्व महसूस हो।’
हेमा जी, आपकी पहचान क्लासिकल डांसर (भरतनाट्यम) के रूप में है, क्या आपको लगता है कि बॉलीवुड में आपके डांस के पोटेंशियल का सही इस्तेमाल नहीं हुआ?
– मैं दुखी हूं इस बात से कि शिखर पर रहने के बाद, अनगिनत फिल्मों में लीड रोल करने के बाद मेरी डांस टैलेंट का उपयोग हिंदी फिल्मों में नहीं हो सका। मेरी इसी तमन्ना के कारण मैंने ‘नूपुर’ यह धारावाहिक बनाया था। चंद फिल्मों में मैंने डांस परफॉर्म किए, लेकिन एक डांस को परफॉर्म करने से क्या संतुष्टि मिलेगी?’
आपके पोतों-पोतियों में डांस की चाहत किन में नजर आती है?
-अरे मत पूछिए! मेरे पांचों ग्रैंड किड्स में। एशा की २ बेटियां और आहना की २ ट्विन्स और एक बेटा, सभी डांस के दीवाने हैं। सभी एक्सपर्ट हैं। उनमें डांस की विरासत देखकर मैं बड़ी प्रसन्न होती हूं।’
आपके डांस स्किल्स को तवज्जो मिले, क्यों नहीं ऐसी फिल्म का निर्माण आपने किया?
-१९६३ से साऊथ फिल्मों से शुरू हुआ मेरा अभिनय करियर फिर हिंदी फिल्मों में धड़ल्ले से शुरू हुआ। मुझे ठीक से याद नहीं २०१७ में मैंने शिमला मिर्ची फिल्म की थी, टीवी धारावाहिक, फिल्म निर्माण-निर्देशन, स्टेज परफॉर्मन्सेस नॉन स्टॉप चलता रहा। मेरे दौर में फिल्म बनाना आसान भी नहीं था। अधिक तर एक फिल्म के निर्माता एक व्यक्ति ही हुआ करते थे, आजकल एक धारावाहिक बनाने के लिए कई निर्माता आगे बढ़ते हैं। नेटफ्लिक्स, अमेजॉन जैसी बड़ी ओटीटी कंपनियां भी हैं, जो अच्छे कॉन्टेंट के लिए निर्माण में आर्थिक सहयोग देती हैं। लेकिन मेरे दौर में ऐसा कुछ नहीं था, अगर फिल्म नहीं चली तो निर्माता सड़क पर आ जाता था। सिर्फ डांस को फोकस करने वाली फिल्म बनाने के लिए कोई मेकर न आगे आया न मुझे वक्त मिला कि मेरे इस टैलेंट पर कुछ फिल्म बनाऊं। एक सेट की शिफ्ट पूरी होने से पहले दूसरी जगह पहुंचने से पहले निर्माता मेरे सेट पर हाजिर होते थे, इतनी भयंकर व्यस्तता थी! कैसे करती मैं कोई फिल्म का निर्माण, जो डांस पर केंद्रित हो! अब मेरी जिंदगी कई हिस्सों में बंटी है, नानी हूं मैं, आज भी नृत्य का रियाज हर दिन करती हूं, मेडिटेशन योगा, भगवान की पूजा, पढ़ना, मथुरा की जनता के लिए काम करते रहना एक नहीं पचासो कामों में मैं उलझी रहती हूं। अब फिल्म मेकिंग कुछ टफ बन गया है मेरे लिए।’
धरम जी (अभिनेता धर्मेंद्र ) अभिनय में आखिर तक सक्रिय नजर आते रहे, कैसा महसूस करती रहीं आप उनकी सक्रियता पर?
-ऑफ़ कोर्स मुझे बेहद ख़ुशी है कि धरम जी आखिर तक फिल्मों में व्यस्त रहे, वे सोशल मिडिया पर भी एक्टिव रहे। मुझे अच्छा ही लगेगा कि मैं, एशा और धरम जी कोई एक साथ कास्ट करें। जो इंसान का पैशन है, उससे जुड़े रहने से इंसान की उम्र बढ़ती है, दिल और दिमाग को तरोताजा रखना निहायत आवश्यक है, जो धरम जी कर रहे थे, एन्ड आय एम वेरी हॅपी टू सी हिम वर्किंग! उनकी आखिरी फिल्म थी इक्कीस। बेहद प्रॉउड फील करते रहे हम सब उनकी उपलब्धी पर। धरमर जी फिल्मों के आखिर तक काम करते रहे, चूंकि यह उनके लिए थेरपी थी।
कितनी संतुष्ट हैं आप अभिनय, राजनीति, व्यक्तिगत जीवन में?
-मैं बहुत समाधानी-संतुष्ट हूं। मेरी राय में मैंने अपने जीवन के हर रोल को पूरी शिद्दत से निभाया। अम्मा-आप्पा (मम्मी-डैडी), भाइयों की मैं लाड़ली थी, सभी को मैंने प्यार दिया, यह रिश्ता निभाते, डांस में अपना समर्पण दिया, साऊथ और हिंदी फिल्मों में हर किरदार निभाए। अपनी बेटियों को जी जान से देखा, उनकी सुखी जिंदगी देखकर मैं प्रसन्न होती हूं। पत्नी, राजनीतिज्ञ, नानी मैंने अपना शत-प्रतिशत दिया। जब मैं राज्यसभा में गयी तो सोचा, मुझे कुछ नहीं समझ है राजनीति की, क्या करूंगी यहां? लेकिन इसे अपनी एक और जिम्मेदारी मानकर काम किया और काम करते गयी, मुझे मंत्री बनने की कोई महत्वकांक्षा नहीं है, एमपी बनकर लोगों की सेवा करते रहना चाहूंगी।
