प्रेम यादव / भायंदर
मीरा-भायंदर शहर में विकास की तस्वीर ऊपर से भले ही चमकदार दिखे, लेकिन जमीनी सच्चाई बेहद बेकार है। यहां हर रोज हजारों लोग सुबह से लेकर शाम तक पानी के लिए जूझ रहे हैं। कई इलाकों में नल सूखे पड़े हैं और जिन जगहों पर पानी आता भी है, वहां उसकी मात्रा बेहद कम होती है। इसी बीच पानी माफिया इस किल्लत को मुनाफे के मौके में बदल चुके हैं।
भायंदर-पश्चिम के पुराने गांव के राव तालाव के निकट छोटे-छोटे बंगलेनुमा घरों में रहनेवाले कनेक्शन तो घरेलू लिए हैं, लेकिन अपने घरों के आसपास १०००-१००० लीटर के टैंक बैठा रखे हैं और फिर यहीं से पानी के काले धंधे को अंजाम दे रहे हैं। यहां ५००-५०० लीटर की टंकियों को टेंपो के जरिए में ३०० से ५०० रुपए में पानी लोगों के घरों तक पहुंचाए जाते हैं, लेकिन मनपा प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदकर बैठा है। ऐसे में मनपा प्रशासन की मिलीभगत की बात भी कही जा रही है। बता दें कि नई इमारतों और हाउसिंग सोसायटियों में जहां पानी कम आता है, वहां तो पूरी निर्भरता पानी माफियाओं पर ही है।
सबकी अपनी-अपनी हिस्सेदारी
शहर के कई हिस्सों में स्थिति इतनी खराब है कि लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। कई बार पाइपलाइन में सीवेज मिल जाने से दूषित पानी घरों तक पहुंच जाता है। नागरिकों का कहना है कि शिकायतें बार-बार करने के बावजूद प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठाता। ऐसे में पानी माफियाओं के हौसले और बुलंद हो गए हैं। नागरिकों का कहना है कि मनपा के अधिकारी और कुछ स्थानीय नेता इस खेल से भलीभांति वाकिफ हैं। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होती। माफिया रात में नहीं, बल्कि दिन में खुलेआम टैंकर भरते हैं। मनपा के गेट के सामने तक पानी बिकता है। अगर प्रशासन चाहे तो दो दिन में यह धंधा बंद हो सकता है, लेकिन शायद सबको अपनी-अपनी हिस्सेदारी मिल रही है।
नवघर के निवासी रोहित ठाकुर कहते हैं कि हर महीने मनपा को पानी का टैक्स हम भरते हैं, पानी माफिया खुलेआम कारोबार कर रहे हैं और अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। अब तो पानी भी पैसेवालों की चीज बन गई है।
भायंदर-पूर्व की घरेलू महिला पूनम बताती हैं कि जब पानी नहीं आता तब बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में ५०० रुपए देकर ५०० लीटर वाली टंकी मंगानी पड़ती है। इतनी महंगाई में अब पानी भी जेब काटने लगा है।
स्थानीय व्यापारी मनीष यादव कहते हैं कि हमारे गाले में रोज पानी की जरूरत होती है। अगर पानी नहीं आए तो कारोबार बंद हो जाता है। टैंकर माफिया हमें मजबूरी में लूट रहे हैं। कोई पूछनेवाला नहीं है कि यह पानी आखिर कहां से आता है। यह सब जानते हुए भी मनपा अधिकारी चुप हैं।
