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विद्यार्थी

ऊसर न हो जाँए
इसलिए
बोते रहो बीज
साहित्य का
विद्यार्थियों में
करीना से
और पहुंचा दो उन्हें
स्थाई प्रांगण में
साहित्य के ।
जहां उगे हुए हैं फूल
लोक मंगल के
परंपरा की जमीन पर
फसलें लहराएंगी
मौसम के साथ
कुछ दिनों में
सजग होकर
एक दिन
अवश्यमेव।।

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