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गद्दार सांसदों को शिवसेना संसदीय दल का कानूनी नोटिस… शिवसेना ही मूल पार्टी!..विलय असंभव!!

 सामना संवाददाता / मुंबई

लोकसभा चुनाव में शिवसेना के टिकट पर ‘मशाल’ चुनाव चिह्न से निर्वाचित सांसदों को किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा-४ के अनुसार, अलग हुए सांसद सीधे किसी अन्य दल में शामिल नहीं हो सकते हैं। शिवसेना ही मूल राजनीतिक दल है, इसलिए इस प्रकार का विलय संवैधानिक रूप से असंभव है। इसी आशय का कानूनी नोटिस शिंदे गुट में विलय का प्रयास कर रहे सांसदों को शिवसेना संसदीय दल की ओर से भेजा गया है। लोकसभा में शिवसेना संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने गद्दार सांसद संजय दीना पाटील, संजय उर्फ बंडू जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमराजे निंबालकर, संजय देशमुख और नागेश पाटील-आष्टीकर को नोटिस भेजकर कहा है कि शिंदे गुट में शामिल होने की उनकी कार्रवाई असंवैधानिक और अवैध है।
गद्दार सांसदों का शिंदे गुट में शामिल होना असंवैधानिक!
लोकसभा में शिवसेना संसदीय दल ने नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जिस राजनीतिक दल के नाम और चुनाव चिह्न पर वे लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए, उस मूल दल ने किसी भी प्रकार के विलय या विभाजन को मंजूरी नहीं दी है। यह नोटिस संबंधित सांसदों के साथ-साथ लोकसभा अध्यक्ष को भी भेजा गया है।
नोटिस में कहा गया है कि मीडिया के माध्यम से यह धारणा बनाई जा रही है कि शिवसेना से अलग हुए सांसदों का एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में विलय हो गया है। इस कथित विलय को मान्यता दिलाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन संवैधानिक दृष्टि से यह दावा पूरी तरह अवैध है। अरविंद सावंत ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि शिवसेना ने अपने सभी राजनीतिक और कानूनी अधिकार सुरक्षित रखते हुए यह नोटिस जारी किया है।
जनादेश के विपरीत
मतदाताओं ने शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त करते हुए आपको शिवसेना के नाम और ‘मशाल’ चुनाव चिह्न पर चुना था। यह चुनाव अन्य उम्मीदवारों के साथ-साथ मुख्य रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले उम्मीदवारों के खिलाफ लड़ा गया था। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद किसी दूसरे गुट में शामिल होने का निर्णय मतदाताओं द्वारा दिए गए जनादेश के विपरीत है।
लोकसभा अध्यक्ष ने भी किसी अलग हुए गुट को मान्यता नहीं दी?
 शिवसेना ने इससे पहले ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर इन गद्दार सांसदों को किसी अन्य दल में विलय की अनुमति नहीं देने का अनुरोध किया था।
 पत्र में यह भी कहा गया है कि अब तक लोकसभा अध्यक्ष की ओर से कथित विलय या किसी अलग गुट को मान्यता देने संबंधी कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

गद्दार सांसदों को भेजे गए पत्र में क्या कहा गया है?
१-शिवसेना ही मूल राजनीतिक दल है। इस दल ने शिंदे गुट या किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ विलय की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की है और न ही उसे कोई मंजूरी दी है।
२-शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने इस संबंध में पार्टी की स्पष्ट और दृढ़ भूमिका रखी है।
३-जब मूल राजनीतिक दल का ही विलय नहीं हुआ है, तब विधायी दल (लेजिस्लेटिव पार्टी) के विलय का प्रश्न ही नहीं उठता।
४-कानून के अनुसार, विधायी दल के सदस्य स्वयं किसी स्वतंत्र विलय की प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकते और न ही उसे लागू कर सकते हैं। उन्हें ऐसा करने का कोई संवैधानिक या कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है।

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