शीतल अवस्थी
तंत्र शास्त्र के अनुसार, किसी भी नवरात्रि में यदि दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का जाप विधि-विधान से किया जाए तो साधक की हर परेशानी दूर हो सकती है। इन दिनों आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि चल रही है। अगर आपकी भी कोई समस्या है, तो इस गुप्त नवरात्रि में आगे बताए गए मंत्रों का विधि-विधान से जाप करें। दुर्गा सप्तशती में हर समस्या के लिए एक विशेष मंत्र बताया गया है। ये मंत्र बहुत ही जल्दी असर दिखाते हैं, यदि आप मंत्रों का उच्चारण ठीक से नहीं कर सकते तो किसी योग्य ब्राह्मण से इन मंत्रों का जाप करवाएं, अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। मंत्र जाप की विधि इस प्रकार है-
जप विधि- सुबह जल्दी उठकर साफ वस्त्र पहनकर सबसे पहले माता दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद अकेले में कुशा (एक प्रकार की घास) के आसन पर बैठकर लाल चंदन के मोतियों की माला से इन मंत्रों का जाप करें। इन मंत्रों की प्रतिदिन ५ माला जाप करने से मन को शांति तथा प्रसन्नता मिलती है। यदि जाप का समय, स्थान, आसन, तथा माला एक ही हो तो यह मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाते हैं।
सुंदर पत्नी के लिए मंत्र-
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।
गरीबी मिटाने के लिए-
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्रयदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचिता।।
रक्षा के लिए-
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च।।
स्वर्ग और मुक्ति के लिए-
सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हदि संस्थिते।
स्वर्गापर्वदे देवि नारायणि नमोस्तु ते।।
मोक्ष प्राप्ति के लिए-
त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या
विश्वस्य बीजं परमासि माया।
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्
त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतु:।।
सपने में सिद्धि-असिद्धि जानने का मंत्र-
दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके।
मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय।।
सभी के कल्याण के लिए मंत्र-
देव्या यया ततमिदं जगदात्मशत्तया
निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां
भकत्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा न:।।
भय नाश के लिए-
यस्या: प्रभावमतुलं भगवाननन्तो
ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च।
सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय
नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु।।
रोग नाश के लिए-
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।
बाधा शांति के लिए-
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनासनम्।।
विपत्ति नाश के लिए मंत्र-
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद
प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं
त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।
विशेष मंत्र
गुप्त नवरात्र में देवी साधक और भक्त ‘ॐ ऐं हीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे नम:’ मंत्र जाप करें। मां काली के उपासक ‘ॐ ऐं महाकालाये नम:’ मंत्र का जाप करें। व्यापारी ‘ॐ हीं महालक्ष्मये नम:’ मंत्र का जाप करें। विद्यार्थी ‘ॐ क्लीं महासरस्वतये नम:’ मंत्र जपें।
उपासना मंत्र- (१) शैलपुत्री
वन्दे वांछितलाभाय चन्दार्धकृशेखराम् । वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।
उपासना मंत्र- (२) ब्रह्मचारिणी
दधाना कपाद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू । देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
उपासना मंत्र- (३) चंद्रघंटा
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रवैâर्युता । प्रसादं तनुते महयं चन्दघण्टेति विश्रुता।।
उपासना मंत्र- (४) कूष्माण्डा
सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तुमे।।
उपासना मंत्र- (५) स्कन्दमाता
सिंहासानगता नितयं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्व्नäदमाता यशस्विनी।।
उपासना मंत्र- (६) कात्यायनी
चंद्रहासोज्जवलकरा शाइलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।
उपासना मंत्र- (७) कालरात्रि
एक वेधी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कणिर्काकणी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।
उपासना मंत्र- (८) महागौरी
श्वेते वृषे समरूढ़ा श्वेताम्बराधरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
उपासना मंत्र (९) सिद्धिदात्री
सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैररमरैरपि । सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।
