-पीपीपी मॉडल के नाम पर कौड़ियों के भाव दिए जाएंगे भूखंड?
-कैबिनेट में लिया गया फैसला
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य परिवहन महामंडल (एसटी) की अतिरिक्त और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण जमीनों के विकास के लिए निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा देने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि एसटी की जमीन का मालिकाना हक महामंडल के पास ही रहेगा और डेवलपर्स को ४९+४९ वर्ष के लीज पर विकास का अधिकार देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस पैâसले को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा है।
हजारों करोड़ के भूखंड कौड़ियों के भाव व्यापारियों को देने की साजिश?
एसटी की अतिरिक्त और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण जमीनों के विकास के लिए निजी कंपनियों को शामिल किए जाने के पैâसले पर विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के बहाने एसटी की हजारों करोड़ रुपये मूल्य की जमीनें कौड़ियों के भाव निजी व्यापारियों और बिल्डरों को देने की साजिश की जा रही है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई वैâबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक एसटी डिपो की व्यावसायिक क्षमता का अलग-अलग आकलन कर विकास योजना तैयार की जाएगी। आर्थिक रूप से लाभदायक परियोजनाओं से प्राप्त राशि एसटी के खाते में जमा की जाएगी और उसका उपयोग एसटी के अन्य विकास कार्यों में किया जाएगा।
उधर, इस पैâसले को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठने लगे हैं। आलोचकों का आरोप है कि पीपीपी मॉडल के नाम पर एसटी की प्राइम और करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनें निजी बिल्डरों के लिए खोदी जा रही हैं। उनका कहना है कि विकास की आड़ में सार्वजनिक संपत्ति के व्यावसायिक इस्तेमाल का रास्ता तैयार किया जा रहा है और लंबे समय की लीज भविष्य में निजी हितों को बढ़ावा दे सकती है। सरकार का कहना है कि इस पीपीपी नीति के तहत डेवलपर्स को दी जाने वाली रियायतों और परियोजनाओं को मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा। सरकार के अनुसार, इस योजना से एसटी डिपो की आय बढ़ेगी। साथ ही मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को जोड़कर मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब विकसित करने का भी प्रस्ताव है।
