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अमेरिकी ढोल… लगवा ही दिया न टोल!.. ईरान ने की हदें पार…होर्मुज से गुजरनेवाले हर टैंकर पर २ मिलियन डॉलर

एजेंसी / तेहरान

अमेरिकी ढोल का भी जवाब नहीं। जिस काम में हाथ डाल दे उस काम का सत्यानाश। बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हो रही है। ४० दिनों के ईरान युद्ध के बाद मुश्किल से सीजफायर की खबर आई। मगर लगता है यह दुनिया के लिए बैकफायर करनेवाला है। ईरान ने अब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरनेवाले जहाजों के लिए टोल लगाने की घोषणा कर दी है। इसके अनुसार, जो भी जहाज वहां से गुजरेगा, उसे ईरान को २ मिलियन डॉलर का टोल देना पड़ेगा। जबकि पहले वहां से कोई टोल नहीं वसूला जाता था।
काफी धूमधाम से दो दिन पहले पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ की मध्यस्थता में इस सीजफायर की घोषणा हुई थी। ऐसा लगा था सबकुछ पहले की तरह ठीक हो जाएगा। मगर हुआ उल्टा। ईरान ने वहां टोल वसूलने की बात कहकर पूरा मामला बिगाड़ दिया है। ईरान की इस नई घोषणा ने दुनिया के बाकी देशों को सकते में डाल दिया है। क्योंकि अगर हर जहाज दो मिलियन डॉलर का टोल देने लगेगा तो इससे व्यापार काफी महंगा हो जाएगा। क्रूड ऑयल के महंगे होने से बाकी की सारी चीजों का महंगा होना तय है। हैरानी की बात यह है कि तमाम दावों के बावजूद अमेरिका इस पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा है।
इजरायल ने नहीं माना युद्धविराम
अब अगर ईरान की बातें अमेरिका नहीं मानता है तो फिर युद्धविराम टूटने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। वैसे भी इजरायल ने युद्धविराम को कोई महत्व नहीं दिया है। युद्धविराम के कुछ ही घंटों बाद उसने लेबनान पर ताबड़तोड़ कई हमले करके २५० लोगों को मार डाला।
ईरान ने दिखाया ठेंगा
होर्मुज स्ट्रेट मामले में ईरान ने ट्रंप को ठेंगा दिखा दिया है। असल में ट्रंप ने कहा था कि ईरान से उनकी बात हो गई है और दोनों देश मिलकर होर्मुज से पैसा कमाएंगे। ट्रंप का मानना था कि ईरान एकदम से पस्त हो चुका है और वे जैसा कहेंगे, वह वैसा ही करेगा। मगर ईरान अब अकेले ही टोल वसूलने लगा है।
फिर भड़क सकता है युद्ध
तो क्या यह सीजफायर टूट जाएगा? इस तरह के सवाल लोग पूछ रहे हैं। इसका कारण है ईरान की १० नई व कड़ी शर्तें, जिसे मानना अमेरिका के लिए काफी मुश्किल है। इसमें सबसे ज्यादा किरकिरी पाकिस्तान की हो रही है कि उसने ये वैâसा समझौता करवाया है।
सीजफायर का असर खत्म होता नजर आ रहा है। अमेरिका ने कहा था कि सीजफायर की प्रमुख शर्त है कि होर्मुज को खोलना पड़ेगा। होर्मुज खुला भी मगर चंद जहाजों के गुजरने के बाद हालात फिर से पहले जैसे नजर आ रहे हैं। होर्मुज एक तरह से फिर से बंद हो गया है और जहाज आगे बढ़ने के बाद फिर पीछे लौट रहे हैं।
असल में खाड़ी क्षेत्र में जहाजों को ईरान की नौसेना की ओर से चेतावनी मिली है कि जो भी जहाज बिना अनुमति के होर्मुज स्ट्रेट पार करने की कोशिश करेगा, उसे ‘निशाना बनाकर खत्म कर दिया जाएगा।’ शिपिंग ब्रोकरेज फर्म एसएसवाई ने इसकी पुष्टि की है। मंगलवार शाम दो हफ्ते का युद्धविराम इस शर्त पर हुआ था कि इस संकरे जलमार्ग से जहाजों की ‘सुरक्षित आवाजाही’ सुनिश्चित की जाएगी, लेकिन इसके बाद अब तक बहुत कम जहाज ही यहां से गुजर पाए हैं। यह स्ट्रेट अमेरिका-इसरायल और ईरान के बीच संघर्ष का केंद्र बन गया है।
होर्मुज फिर बंद, पीछे हटे जहाज
सीजफायर का असर खत्म होता नजर आ रहा है। अमेरिका ने कहा था कि सीजफायर की प्रमुख शर्त है कि होर्मुज को खोलना पड़ेगा। होर्मुज खुला भी मगर चंद जहाजों के गुजरने के बाद हालात फिर से पहले जैसे नजर आ रहे हैं। होर्मुज एक तरह से फिर से बंद हो गया है और जहाज आगे बढ़ने के बाद फिर पीछे लौट रहे हैं।
असल में खाड़ी क्षेत्र में जहाजों को ईरान की नौसेना की ओर से चेतावनी मिली है कि जो भी जहाज बिना अनुमति के होर्मुज स्ट्रेट पार करने की कोशिश करेगा, उसे ‘निशाना बनाकर खत्म कर दिया जाएगा।’ शिपिंग ब्रोकरेज फर्म एसएसवाई ने इसकी पुष्टि की है। मंगलवार शाम दो हफ्ते का युद्धविराम इस शर्त पर हुआ था कि इस संकरे जलमार्ग से जहाजों की ‘सुरक्षित आवाजाही’ सुनिश्चित की जाएगी, लेकिन इसके बाद अब तक बहुत कम जहाज ही यहां से गुजर पाए हैं। यह स्ट्रेट अमेरिका-इसरायल और ईरान के बीच संघर्ष का केंद्र बन गया है।
ग्लोबल अर्थव्यवस्था को झटका
होर्मुज स्ट्रेट में पिछले पांच हफ्तों से जारी इस अड़चन से ग्लोबल अर्थव्यवस्था को झटका लगा है। इससे तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। यह भी साफ हो गया है कि अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई चेन इस स्ट्रेट पर किस हद तक निर्भर है। एनर्जी के अलावा, ये इलाका उन केमिकल्स की ढुलाई के लिए भी अहम है जिनका इस्तेमाल माइक्रोचिप्स, दवाइयों और खादों जैसे प्रोडक्ट के निर्माण में होता है। युद्धविराम की खबर के बाद भले ही तेल की कीमतों में गिरावट आई हो, लेकिन शिपिंग विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यहां से जहाजों की आवाजाही काफी सीमित ही रहेगी।

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