-दुर्लभ चुंबकीय धातु के निर्यात पर लगाई रोक
-बुरी तरह से प्रभावित होगा देश का ईवी उद्योग
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
भारत की ईवी मार्केट के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं। चीन ने भारत के लिए ईवी इंडस्ट्री में काम आनेवाली एक दुर्लभ चीज का निर्यात रोका है। यह चीज इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ज्यादा जरूरी है। सीधे शब्दों में कहें तो इसके बिना कोई भी वाहन बनकर तैयार नहीं हो सकता है। इस चीज का उपयोग मोटर और स्टीयरिंग से लेकर ब्रेक, वाइपर और ऑडियो उपकरण तक के सिस्टम में किया जाता है। इसके बिना वाहनों का उत्पादन रुक जाएगा। वाहन उद्योग में चीन की सर्जिकल स्ट्राइक कहा जा रहा है।
बता दें कि चीन द्वारा एक्सपोर्ट नियमों में बदलाव के कारण शिपमेंट में देरी होने से कंपनियां परेशान हैं और चेतावनी दे रही हैं कि अगर आपूर्ति जल्द ही बहाल नहीं की गई तो वाहन उत्पादन में रुकावटें पैदा हो सकती हैं। इस दुलर्भ चीज का नाम नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन चुंबक है। बोलचाल की भाषा में इसे दुर्लभ चुंबकिए धातु भी कहा जाता है। इसका ज्यादातर उत्पादन चीन से ही दुनियाभर के देशों में होता है।
मंजूरी का लंबा इंतजार
नए नियमों के तहत निर्यातकों को शिपिंग से पहले खरीदारों से सरकारी लाइसेंस और विस्तृत अंतिम उपयोग प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा। इसके बावजूद एक्सपोर्टर को मंजूरी का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। भारत आने वाली कई खेपें चीनी बंदरगाहों पर फंसी हुई हैं और कोई हलचल नहीं दिख रही है।
सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा
विदेशी निर्भरता कम करने के लिए भारत घरेलू उत्पादन की योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। ३ जून को एक बैठक तय की गई है, जिसमें उद्योग मंत्रालय प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे समेत चुंबक निर्माण के लिए एक सपोर्ट इंप्रâास्ट्रक्चर को अंतिम रूप देगा।
७०० टन आयात की योजना
भारत ने वित्त वर्ष २०२४ में ४६० टन दुर्लभ चुंबकिए धातु आयात किए। वो सभी चीन से ही थे और इस साल ७०० टन आयात करने की योजना है। आज बड़े पैमाने पर कोई विकल्प मौजूद नहीं है, जिससे भारतीय उत्पादन लाइनें असुरक्षित हो जाती हैं।
