मुख्यपृष्ठनए समाचारआस्था की आड़ में हथियारों की नुमाइश....कानून मूकदर्शक?

आस्था की आड़ में हथियारों की नुमाइश….कानून मूकदर्शक?

राजेश सरकार / प्रयागराज

परशुराम जयंती पर यमुनानगर के कोरांव बाजार में निकली शोभायात्रा अब आस्था से ज्यादा कानून व्यवस्था पर सवालों का कारण बन गई है। भीड़भाड़ वाले बाजार में तलवार, फरसा और कटवासा लहराते लोगों का वीडियो सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल होते ही सियासी संग्राम तेज हो गया। रविवार को जिला पंचायत सदस्य और उनके सहयोगियों की अगुवाई में निकली इस यात्रा में भारी भीड़ उमड़ी। लेकिन कोरांव बाजार पहुंचते ही दृश्य बदल गया। बीच सड़क पर जुलूस थम गया। नारेबाजी शुरू हुई और हथियार लहराते हुए प्रदर्शन होने लगा। बीच बाजार ‘शक्ति प्रदर्शन’ के इस अंदाज ने न सिर्फ यातायात को ठप कर दिया। बल्कि आम लोगों की सुरक्षा को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी संगठनों लोहिया वाहिनी, भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी ने मोर्चा खोल दिया। पुलिस-प्रशासन को टैग कर तीखे सवाल दागे जा रहे हैं कि आखिर सार्वजनिक स्थान पर खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन किसकी अनुमति से हो रहा था? क्या कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है? विपक्षी नेताओं ने आर्म्स एक्ट 1959 का हवाला देते हुए इसे कानून की सीधी अनदेखी बताया। लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष पवन सिंघाल पटेल ने इसे “कानून व्यवस्था की पोल खुलना” कहा, वहीं आजाद समाज पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश चौधरी ने इसे “खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाना” करार दिया। भीम आर्मी से जुड़े नेताओं ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में कानून का खौफ खत्म होता दिख रहा है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला गर्म है। कहीं नियमों की दुहाई, तो कहीं पुलिस की निष्क्रियता पर तंज। जाम और अफरा-तफरी से नाराज स्थानीय लोग भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है? आस्था के नाम पर शक्ति प्रदर्शन और कानून की अनदेखी-कोरांव की यह तस्वीर अब एक जुलूस से आगे बढ़कर व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल बन चुकी है।

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