मुंबई सहित महाराष्ट्र में देश का सबसे बड़ा ड्रग्स रैकेट चलाया जा रहा है। ठाणे जिले के टिटवाला में छह करोड़ कीमत की पांच हजार एक्स्टसी नशीली गोलियां जब्त की गर्इं। गोरेगांव के नेस्को में एक ‘संगीत शोर-शराबा’ कार्यक्रम में युवाओं ने खुलेआम ड्रग्स का सेवन किया। उस अति-सेवन के कारण दो युवाओं की मृत्यु हो गई। इससे पहले सातारा में दरे गांव के पास नशीले पदार्थों यानी नशे की गोलियां बनानेवाली फैक्ट्री पर मुंबई पुलिस ने छापा मारा था। इस पैâक्ट्री से अनेक राजनीतिक नेताओं के संबंध उजागर होने के कारण मुख्यमंत्री फडणवीस ने मामला दबा दिया। मुंबई, पुणे, नासिक, ठाणे, नागपुर में नशे का यह खुला व्यापार और सेवन जारी रहते हुए भाजपा विचारधारा के ढोंगी बाबाओं ने सैकड़ों महिलाओं पर अत्याचार किए। उनके यौन शोषण के मामले उजागर हुए। यह बात महाराष्ट्र जैसे राज्य की प्रतिष्ठा पर कालिख पोतनेवाली होने के बावजूद, मुख्यमंत्री फडणवीस इन नशा और शोषण के मामलों की अनदेखी कर नारी शक्ति के नाम पर राजनीतिक आंदोलन का राग अलाप रहे हैं। इन सभी ड्रग्स का नशा महाराष्ट्र सरकार को चढ़ गया है और वे नशेड़ी ‘जोंबी’ हो गए हैं। वैसा नहीं होता तो महाराष्ट्र की
ऐसी धुंध अवस्था की ओर
अनदेखी कर मुख्यमंत्री ने डिलिमिटेशन (परिसीमन) विधेयक की राजनीति शुरू नहीं की होती। लोकसभा में डिलिमिटेशन विधेयक हार गया। संविधान संशोधन को सांसदों ने मान्यता नहीं दी। इसलिए भाजपा वाले ऐसा आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं मानो कलेजा फट गया है। महिला आरक्षण का विधेयक सितंबर २०२३ में ४५४ मतों के बहुमत से मंजूर हुआ। यह विधेयक मंजूर करने के लिए आज के मुख्यमंत्री फडणवीस ने नरेंद्र मोदी का आभार माना और संपूर्ण देशभर की नारी शक्ति का भी अभिनंदन किया था। विधेयक मंजूर होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने उस समय भी ‘राष्ट्र के नाम’ संदेश देकर विधेयक की मंजूरी का श्रेय खुद ही लिया था। फिर अब उनका छाती पीटना क्यों शुरू है? उनका कुछ ऐसा कहना था कि नारी शक्ति विधेयक की भ्रूणहत्या कर दी गई। किसने? जिस बच्चे का जन्म साल २०२३ में हुआ, वैसी कानूनी प्रविष्टि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से हुई, अब तीन साल बाद २०२६ में उसकी भ्रूणहत्या होने का स्यापा ये लोग वैâसे कर सकते हैं? एक तो ये लोग नशे के प्रभाव में हैं। उनका उड़ता भाजपा हो गया है या उनका मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं है। सत्य स्वीकार करने के लिए हिम्मत की जरूरत होती है, झूठ बोलने के लिए कपट की जरूरत। भाजपावाले ऊपर से नीचे तक झूठ बोल रहे हैं। ‘United Opposition defeats Delimitation Bill’ यानी विपक्ष की एकजुटता ने संसद में निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन विधेयक को हरा दिया, ऐसा शीर्षक
‘द हिंदू’ जैसे
प्रतिष्ठित लोकमान्य समाचार पत्र ने दिया। क्या यह शीर्षक गलत है? विपक्ष की एकजुटता ने मोदी-शाह की चालाकी, हाथ की सफाई उजागर कर दी। राहुल गांधी जिन्हें जादूगर कहते हैं, वे वैसे जादूगर नहीं हैं। वे लोग इस उंगली की थूक उस उंगली पर करनेवाले हाथ की सफाई के विशेषज्ञ हैं। नासिक का खरात बाबा भी यही धंधे कर रहा था। उसका पर्दाफाश हुआ वैसे ही गुलाबी साड़ी पहनाकर संसद में पेश किए गए डिलिमिटेशन बिल का भी हुआ। दक्षिण के राज्यों की लोकसभा सीटें कम करके उत्तर भारत की बढ़ी हुई सीटों के दम पर भाजपा को सत्ता का अमरबेल प्राप्त करना था। विपक्ष ने भाजपा की यह चाल नाकाम कर दी। देश की एकता और अखंडता को कमजोर करने वाला कपटी विधेयक नामंजूर कर दिया। महिला आरक्षण विधेयक का किसी ने विरोध नहीं किया है। १६ अप्रैल २०२६ को केंद्र सरकार ने अधिसूचना निकालकर महिला आरक्षण के विधेयक को कानून में बदल दिया। अब दिल्ली में मोदी और महाराष्ट्र में फडणवीस किस नारी शक्ति वंदन विधेयक पर तांडव कर रहे हैं? राजनीति बदमाशों का, गुंडों का अड्डा है। उस अड्डे पर डिलिमिटेशन विधेयक को साड़ी पहनाकर नचाया जा रहा है। यह महाराष्ट्र के लिए अच्छा नहीं है, लेकिन बोले कौन? इसी बहाने भाजपा के भीतर का ‘द्वंद्व’ उजागर हो गया। भाजपा में सब ठीक नहीं है। भविष्य में बड़े विस्फोट होने की संभावना है। महिला आरक्षण का विवाद उस विस्फोट से पहले की चिंगारी है। यह सारा प्रकार देखते हुए एक ही दिखता है, वह यह कि भाजपा का दिमाग अभी भी ‘भ्रूण’ अवस्था में है। पूर्ण विकास होने पर उनसे चर्चा की जा सकती है!
