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डोंबिवली में विकास का `फुटपाथ मॉडल’…पहले बनाओ, तोड़ो और फिर बनाओ!..सरकार के पैसे का हो रहा दुरुपयोग

सामना संवाददाता / डोंबिवली

डोंबिवली एमआयडीसी क्षेत्र में विकास की एक अनोखी परंपरा चल पड़ी है। यहां रास्ता बनाओ, फोटो खिंचवाओ और फिर उसे तोड़कर नया टेंडर लाओ। शुक्रवार को ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला। मिलापनगर के रास्ता क्रमांक १५ पर एक महीने पहले बना ताजातरीन कांक्रीट रोड अचानक टूटने लगा। कारण? सीवर चेंबर्स का चोकअप होना।
स्थानीय नागरिकों ने जब भारी वाहन को नए-नवेले रास्ते पर देखा तो सोचा कि शायद कोई मंत्री आने वाले हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही थी। एमआयडीसी के ठेकेदार के कर्मचारियों ने बताया कि सीवर चेंबर्स रोड के नीचे दबे हैं और जब तक रोड नहीं तोड़ेंगे, गंदगी नहीं निकलेगी। अब सवाल ये उठता है कि जब रोड बनाने से पहले एमआयडीसी को इस बाबत लिखा गया था तो उन्होंने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की और इस पर मौनव्रत धारण क्यों किया?
खास बात ये है कि यह रोड शिंदे गुट के सचिव भाऊसाहेब चौधरी के अथक प्रयासों से राज्य सरकार से विशेष निधि मंगाकर, केडीएमसी के माध्यम से बना था। लेकिन नाली और नासमझी की दोस्ती ने एक बार फिर जनता के पैसों को सड़क पर बिछा दिया।
एमआयडीसी वसाहत में एक साल पहले भी एमएमआरडीए ने कुछ हिस्सों में सड़कें बनाई थीं, जिनमें गड्ढे, दरारें और जलनिकासी की समस्याएं इनबिल्ट सुविधाओं की तरह थीं। अब हालत ये है कि बिजली, पानी, गैस, गटर, सबकी खुदाई के लिए सड़कों की हालत ‘प्याज’ जैसी हो गई है यानी हर परत के नीचे एक और खुदाई का कारण। ये सब देखकर जनता कहने लगी है कि डोंबिवली में अब विकास की नई परिभाषा है, ‘बनाओ, ताकि तोड़ा जा सके, तोड़ो, ताकि फिर बनाया जा सके।’ इस क्रम में जनता की गाढ़ी कमाई की गारंटी है कि उसका उपयोग नहीं, उपहास जरूर होगा।

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