मुख्यपृष्ठटॉप समाचारअब ईरान में शुरू होगा फांसी का सिलसिला...अमेरिकी जासूसों की धरपकड़ शुरू!

अब ईरान में शुरू होगा फांसी का सिलसिला…अमेरिकी जासूसों की धरपकड़ शुरू!

-ईरान ने एक दिन में दबोचे ५० अमेरिकी-इजरायली जासूस

-अन्य जासूसों को पकड़ने के लिए देश में व्यापक मुहिम शुरू

एजेंसी / तेहरान

इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल होते ही ईरान ने अमेरिका और इजरायल के जासूसों की धरपकड़ शुरू कर दी है। खबर है कि एक दिन में ही ईरान ने ऐसे ५० जासूसों को दबोचा है, जो अमेरिका और इजरायल को खुफिया जानकारी मुहैया करा रहे थे। माना जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में इन दोनों देशों ने ईरान में सैकड़ों जासूसों को तैयार किया था। सूत्रों के अनुसार, अभी तो शुरूआत है और आनेवाले दिनों में अभी अन्य जासूसों की भी धरपकड़ की जाएगी।
ईरान ने गिरफ्तार किए जासूसों पर दुश्मन (अमेरिका-इजरायल) को देश की संवेदनशील जानकारी और लोकेशन शेयर करने के आरोप लगाए हैं। ईरानी पुलिस और सुरक्षाबलों ने यह कार्रवाई ऐसे समय की है, जब ४० दिनों के युद्ध के बाद फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर है।
अल जजीरा ने दी रिपोर्ट
‘टीवी चैनल’ ‘अल जजीरा’ ने ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया है कि ईरानी अधिकारियों ने पैसे लेकर दुश्मन के लिए काम करने जैसी गतिविधियों के लिए इन जासूसों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों के खिलाफ मुकदमा चला जाएगा और सजा का एलान होगा। ईरान में ऐसे आरोपियों को फांसी की सजा दी जाती है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि इन सभी जासूसों को भी फांसी दी जाएगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स, सैटेलाइट उपकरण-हथियार जब्त
रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों के इस ग्रुप पर सर्विस पैâसिलिटीज और इंप्रâास्ट्रक्चर की जानकारी देने का आरोप है। गिरफ्तार जासूसों से इलेक्ट्रॉनिक्स, सैटेलाइट उपकरण और हथियार भी जब्त किए हैं।
काफी सख्त है कानून
ईरान में दुश्मन देशों के लिए जासूसी करने के खिलाफ काफी सख्त कानून हैं। ईरान ने हाल ही में जासूसी कानून को और ज्यादा सख्त कर दिया है। जासूसी के आरोपी लोगों को ईरान में मौत की सजा और संपत्ति जब्त किए जाने का सामना करना पड़ता है।
वार्ता टूटी, विनाश निश्चित! ट्रंप के प्रस्ताव को ईरान की मनाही

इस्लामाबाद शांति वार्ता के फेल होने के बाद अब विनाश की आहट निश्चित है। ऐसा इसलिए कि अमेरिका अब पलटकर ज्यादा खतरनाक हमला करने की तैयारी में है। वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित न करने की अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार करने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच रविवार (१२ अप्रैल) सुबह शांति समझौते के बिना वार्ता समाप्त हो गई।
उल्लेखनीय है कि पश्चिमी एशिया में हजारों लोगों की जान ले चुके इस युद्ध के सातवें सप्ताह में प्रवेश करने के बाद दो हफ्ते के नाजुक युद्धविराम की घोषणा हुई, जिसके कुछ दिनों बाद अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक आमने-सामने की वार्ता का तीसरा दौर समाप्त हुआ।
इस संबंध में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने रविवार सुबह एक बयान जारी करते हुए कहा, ‘ईरानी वार्ताकार ईरान के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए अपनी सभी क्षमताओं, अनुभव और ज्ञान का उपयोग कर रहे हैं। हमारे महान बुजुर्गों, प्रियजनों और देशवासियों के भारी नुकसान ने ईरानी राष्ट्र के हितों और अधिकारों को आगे बढ़ाने के हमारे संकल्प को पहले से कहीं अधिक दृढ़ बना दिया है।’ बाकाई ने आगे कहा कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दा, युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंधों को हटाना और ईरान तथा क्षेत्र में युद्ध की पूर्ण समाप्ति सहित मुख्य वार्ता विषयों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन इस राजनयिक प्रक्रिया की सफलता अमेरिकी डेलिगेशन की गंभीरता और सद्भावना, अत्यधिक मांगों और गैरकानूनी अनुरोधों से परहेज करने और ईरान के वैध अधिकारों और हितों को स्वीकार करने पर निर्भर करती है।’
ट्रंप से ६ बार की बात
वेंस ने कहा कि उन्होंने पिछले २१ घंटों में ट्रंप से ‘लगभग छह-बार’ बात की और विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और अमेरिकी केंद्रीय कमान के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर से भी बात की। विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ पोडियम पर खड़े होकर बोलते हुए वेंस ने कहा, ‘हम टीम के साथ लगातार संपर्क में थे।
अमेरिका का मूल लक्ष्य
वेंस ने बताया, ‘सीधी बात यह है कि हमें ईरान से साफ और ठोस प्रतिबद्धता चाहिए कि वह न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा और न ही ऐसे साधन जुटाएगा, जिनसे वह जल्दी परमाणु हथियार बना सके।’ उन्होंने आगे कहा, ‘यही संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति का मूल लक्ष्य है और यही हमने इन वार्ताओं के माध्यम से हासिल करने की कोशिश की है।’

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