सामना संवाददाता / मुंबई
शायद पहले किसी को यह अंदाजा नहीं था कि इतना बड़ा घोटाला हो सकता है, लेकिन २० दिन में १४ हजार करोड़ का टेंडर निकालना और फिर कोर्ट द्वारा चेतावनी मिलने पर उसे रद्द करना ये सब दर्शाता है कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है। इतना बड़ा ठेका रद्द करना सामान्य बात नहीं है, क्योंकि आमतौर पर किसी ठेकेदार में सरकार के खिलाफ कोर्ट में जाने की हिम्मत नहीं होती, लेकिन इस केस ने साबित कर दिया कि इस देश में सत्यमेव जयते की जीत होती है, सत्तामेव जयते की नहीं। इस तरह का जोरदार हमला करते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता व युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे ने मांग की है कि मेघा घोटाले में भ्रष्टनाथ शिंदे को मंत्री पद से हटाओ। साथ ही ईडी, आईटी, न्यायिक जांच करो।
उन्होंने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इन सभी विभागों की न्यायिक जांच कराएंगे। इसके साथ ही वे घोड़बंदर-भायंदर उन्नत मार्ग और सुरंग योजना पर आक्रामक दिखे। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अधीन आनेवाले नगर विकास विभाग में हाल ही में कई घोटाले सामने आए हैं। इसमें मुंबई में सड़क घोटाला, मीठी नदी से कीचड़ निकालने का घोटाला, मेट्रो स्टेशन में पानी भरने, पहली ही बारिश में मुंबई में जलभराव की स्थिति और हाल ही में सामने आया एमएमआरडीए का टेंडर घोटाला। इन सभी मामलों पर आदित्य ठाकरे ने जोरदार तरीके से निशाना साधा है। आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि यह स्पष्ट है कि यह भ्रष्टाचार का मामला था और जब कोर्ट की तलवार लटक रही थी, तब जाकर सरकार ने टेंडर रद्द किया। आदित्य ठाकरे ने कहा कि पिछले साल तीन अक्टूबर को मातोश्री में आयोजित पत्रकार परिषद में उन्होंने इसी सड़क प्रोजेक्ट और उसमें हुए घोटाले पर सवाल उठाए थे।
उस समय एमएमआरडीए ने १४,००० करोड़ रुपए की निविदा निकाली थी। उसके लिए केवल २० दिन का समय दिया गया था, जो कि १३ सितंबर २०२४ से ३ अक्टूबर २०२४ तक था। उन्होंने तब भी सवाल उठाया था कि आखिर ऐसी क्या जल्दी थी कि एक खास ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए २० दिन में पूरी टेंडर प्रक्रिया निपटाई जा रही थी, क्योंकि आमतौर पर इतने बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए इतनी कम समयसीमा नहीं रखी जाती।
सुप्रीम कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी
आदित्य ठाकरे ने कहा कि चुनाव के समय भाजपा को ६०० करोड़ रुपए का ‘इलेक्टोरल बांड’ देने वाली मेघा इंजीनियरिंग कंपनी को ठेका देने के लिए घोटाला किया गया, लेकिन इस महायुति सरकार को सुप्रीम कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी। एमएमआरडीए ने ६,००० करोड़ रुपए के एलिवेटेड रोड और ८,००० करोड़ रुपए के ठाणे-घोड़बंदर से भायंदर सुरंग परियोजना की टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दिया। कोर्ट ने सरकार को झटका दिया है और अब जिनकी जेबें भर रही थीं, उनकी कमाई पर रोक लग गई है। इस पर आदित्य ठाकरे ने कोर्ट और अदालत में लड़ाई लड़ने वाली एलएंडटी कंपनी का आभार जताया।
