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तड़का : ‘चैंपियन ऑफ चैंपियंस!’… छह छक्कों से स्टैंड तक का अद्भूत सफर

कविता श्रीवास्तव

रवि शास्त्री भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं, जिनका योगदान क्रिकेट के हर क्षेत्र में प्रेरक है। ८० और ९० के दशक के इस दिग्गज ऑलराउंडर को हाल ही में बड़ा सम्मान मिला है। उनकी अपनी मुंबई के प्रतिष्ठित वानखेड़े स्टेडियम में उनके नाम पर एक स्टैंड का उद्घाटन हुआ है। यह न केवल रवि शास्त्री के गौरवशाली करियर का सम्मान है, बल्कि भारतीय क्रिकेट की जगमगाती स्मृतियों को जीवंत बनाने का प्रयास भी है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर सुनील गावस्कर, दिलीप वेंगसरकर, डायना एडुलजी और सूर्यकुमार यादव जैसे कई दिग्गज उपस्थित थे। इस सम्मान से भावुक हुए रवि शास्त्री ने मुंबई क्रिकेट की ‘खड़ूस’ संस्कृति को याद किया और कहा कि वानखेड़े स्टेडियम की पिच पर हार को कभी स्वीकार नहीं किया जाता था। उन्होंने अपने पिता को भी याद किया, जो उनके जीवन के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे। मुंबई में क्रिकेट की समृद्ध विरासत रही है, जिसने देश को कई महान खिलाड़ी दिए हैं। उन्हीं में शामिल रवि शास्त्री का क्रिकेट करियर ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा हुआ है। १९८१ में अपने टेस्ट डेब्यू के साथ उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम में खुद को एक भरोसेमंद ऑलराउंडर के रूप में स्थापित किया। १९८५ की वर्ल्ड चैंपियनशिप उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जहां उन्हें ‘चैंपियन ऑफ चैंपियंस’ का खिताब मिला। इसी वर्ष रणजी ट्रॉफी में एक ओवर में छह छक्के लगाने का उनका रिकॉर्ड आज भी क्रिकेट इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। रवि शास्त्री ने भारत के लिए ८० टेस्ट और १५० वनडे मैच खेले। उन्होंने ३,८०० से अधिक रन बनाए और १५० से अधिक विकेट हासिल किए। उनकी खासियत थी कि वे टीम की जरूरत के अनुसार अपनी भूमिका बदल सकते थे। फिर चाहे ओपनिंग बल्लेबाजी हो या मिडिल ऑर्डर में टिककर खेलना या फिर किफायती गेंदबाजी करना। कपिल देव, श्रीकांत और अजहरुद्दीन के समय में वे देश के उप कप्तान थे। कप्तान के रूप में उन्हें लंबा अवसर नहीं मिला। एक टेस्ट मैच और ११ वनडे में वे भारत के कप्तान भी रहे। सटीक रणनीतिक सोच और शांत स्वभाव ने उन्हें प्रभावी कप्तान सिद्ध किया।
कोच और कमेंटेटर के
रूप में भी रहे कुशल
कुशल कोच के रूप में उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वे २०१७ से २०२१ तक भारतीय टीम के मुख्य कोच रहे। उन्होंने टीम को आक्रामक और आत्मविश्वासी बनाया, जिसका परिणाम ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत के रूप में सामने आया। क्रिकेट से संन्यास के बाद रवि शास्त्री ने कमेंटेटर और विश्लेषक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई, जिसने क्रिकेट प्रेमियों के बीच उन्हें बेहद लोकप्रिय बनाया। वानखेड़े स्टेडियम में उनके नाम पर स्टैंड का उद्घाटन केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उस संघर्ष, समर्पण और जुनून की पहचान है, जिसने रवि शास्त्री को एक साधारण खिलाड़ी से भारतीय क्रिकेट का महानायक बना दिया। उनका जीवन और करियर आनेवाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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