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सरकार का आधुनिक टास्क फोर्स फेल…डार्क वेब से मुंबई में ड्रग्स!.. गोरेगांव कांड से हुआ खुलासा

फिरोज खान / मुंबई

मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में नशीले पदार्थों पर काबू पाने के लिए राज्य सरकार ने आधुनिक और खुफिया नेटवर्क के साथ टास्क फोर्स का गठन किया था, लेकिन यह टास्क फोर्स पूरी तरह फेल है। बार, पब और रेव पार्टियों के अलावा गली-कूचे तक नशीले पदार्थों का धंधा सरेआम चल रहा है। गोरेगांव में आयोजित म्यूजिक कॉन्सर्ट में ड्रग्स लेने से दो छात्रों की मौत हो गई। पुलिस को आशंका है कि इस कॉन्सर्ट के लिए लाखों रुपए की ड्रग्स की सप्लाई डार्क वेब के जरिए की गई थी।
पुलिस की मिलीभगत से धंधा…पुलिस इन्फॉर्मर का खुलासा
गली में छोटी सी पुड़िया से लेकर रेव पार्टियों में पंहुचने वाले नशे की खबर पुलिस को होती है। कार्रवाई तभी होती है जब कभी शिकायत होती है या फिर हफ्ते की रकम समय पर नहीं पंहुचती। नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस के खबरी ने बताया कि अंधेरी पश्चिम, वडाला, डोंगरी, गोवंडी, मुंब्रा और मीरा रोड में रात के समय पर खुलेआम नशा बिकता है।
प्राइवेट सिक्योरिटी में होते हैं कॉन्सर्ट!
पुलिस सिर्फ देती है परमिशन, नहीं करती कोई चेकिंग
इस तरह के कॉन्सर्ट जहां भी आयोजित होते हैं, वहां प्राइवेट सिक्योरिटी लगाई जाती है। पुलिस से सिर्फ परमीशन ली जाती है। इसके अलावा कुछ ‘सेटिंग’ कर दी जाती है, जिसके कारण पुलिस बाद में झांकती तक नहीं कि वहां क्या हो रहा है। ऐसे में वहां पर धड़ल्ले से अनैतिक गतिविधियां चलती रहती हैं।

कल्याण से आया था ‘डेंजरस’ ड्रग्स!
नेस्को सेंटर कॉन्सर्ट त्रासदी से जुड़े वनराई ड्रग ओवरडोज मामले में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। वनराई पुलिस सूत्रों के अनुसार, कॉन्सर्ट में ड्रग्स की सप्लाई कल्याण से हुई थी। इस मामले में पुलिस ने छठे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की उम्र २५ साल की है और वह कल्याण का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि वह कंस्ट्रक्शन के कारोबार से जुड़ा है और पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों का दोस्त है। ये ड्रग्स डार्क वेब से मंगाए गए थे। डार्क वेब एक अलग सॉफ्टवेयर से चलता है, जहां सारी अवैध गतिविधियां और धंधे होते हैं।
पुलिस को शक है कि इस आरोपी ने ही इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों को ड्रग्स की सप्लाई की थी। उसे कल १६ अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। बता दें कि यह मामला एक म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान हुए ड्रग ओवरडोज की घटना से जुड़ा है, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। मामले की जांच जारी है और अधिकारियों ने आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया है। इस आरोपी के वकील ने कहा कि उसके मुवक्किल के पास से कोई ड्रग्स बरामद नहीं हुई है। उन्होंने दलील दी कि उसे सिर्फ इसलिए आरोपी बनाया गया है, क्योंकि वह अन्य आरोपियों के संपर्क में था और उनका दोस्त था।

४,००० लोग थे मौजूद
इस कार्यक्रम में ४,००० से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था, जिसमें से सैकड़ों लोगों ने नशा किया था। लाखों रुपए के ड्रग्स कार्यक्रम में हिस्सा लेने पंहुचे लोगों के लिए मंगाए गए थे। यह ड्रग्स डार्क वेब के जरिए छात्रों तक पंहुचा था।

कोड वर्ड ‘लवर्स स्पीड’
कॉलेज छात्र बड़े पैमाने पर रेव पार्टी में ‘लवर्स स्पीड’ और डिस्को बिस्किट नाम के ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं। असल में यह कोडवर्ड है, जिसका ओरिजनल नाम एक्टेसी है। पार्टी के दौरान जोश पैदा करना, उत्तेजित होना, कामुकता बढ़ाना और भरपूर आनंद लेने के लिए इस ड्रग्स का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही स्पर्श संबंधी अनुभवों का आनंद बढ़ाने के लिए भी किया जाता जाता है।

२ हजार रुपए की एक गोली
लवर्स स्पीड ड्रग्स पावडर की कीमत प्रति किलो २ करोड़ रुपए बताई जाती है और टेबलेट १,६०० से २००० रुपए प्रति गोली में बिकती है।

ओवरडोज से होती है मौत
सेवन की मात्रा ज्यादा होने पर यह सीधे लीवर और किडनी को फेल कर देता है और व्यक्ति की फौरन मौत हो जाती है। गोरेगांव रेव पार्टी कांड में शुरूआती जांच में यही पता चला है कि उन लोगों द्वारा ड्रग्स का ओवरडोज लिया गया था।

१०० करोड़ की ड्रग्स जब्त
इस साल अभी तक पुलिस ने २०० के करीब केस दर्ज किए और लगभग २५० से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान १०६ किलो से ज्यादा नशीले पदार्थ बरामद हुए, जिनकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग १०० करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है।

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