मुख्यपृष्ठखबरेंअंडरवर्ल्ड सीक्रेट : मुंबई अंडरवर्ल्ड का सच

अंडरवर्ल्ड सीक्रेट : मुंबई अंडरवर्ल्ड का सच

-पहला एनकाउंटर मान्या सुर्वे नहीं, बल्कि १९८० में लुइस डिसूजा का हुआ था

सूरज सिंह

मुंबई का अंडरवर्ल्ड इतिहास हमेशा रहस्यों, आधे-सच और चर्चाओं से घिरा रहा है। खासकर ‘पहला पुलिस एनकाउंटर’ किसका था, यह सवाल पिछले कई दशकों से लोगों के बीच बहस का विषय बना हुआ है। आमतौर पर लोगों को यही बताया गया कि मुंबई में पहला एनकाउंटर कुख्यात अपराधी मान्या सुर्वे का था, जिसे ११ जनवरी १९८२ को वडाला में पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। इस घटना को इतना प्रचार मिला कि इसी पर आधारित फिल्म ‘शूट आउट एट वडाला’ भी बनी, जिसमें इस मुठभेड़ को ऐतिहासिक बताया गया। लेकिन जब हम मुंबई पुलिस के रिकॉर्ड और पुराने दस्तावेजों को ध्यान से देखते हैं, तो यह कहानी कुछ और ही सामने आती है। वास्तविकता यह है कि मुंबई का पहला दर्ज पुलिस एनकाउंटर मान्या सुर्वे का नहीं, बल्कि लुइस जोसेफ डिसूजा का था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, लुइस को १४ अक्टूबर १९८० को मालवणी इलाके में एक मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया था। खास बात यह है कि लुइस किसी बड़े अंडरवर्ल्ड गैंग से जुड़ा हुआ नहीं था, बल्कि वह अपना अलग गिरोह चलाता था और स्थानीय स्तर पर अपराधों में सक्रिय था। इसके बाद दूसरे नंबर पर डोंगरी के माजीद का नाम सामने आता है, जिसे कथित तौर पर १९८१ में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। हालांकि, इस एनकाउंटर को लेकर भी स्पष्ट और पुख्ता जानकारी कम ही उपलब्ध है, जिसके कारण यह घटना ज्यादा चर्चा में नहीं आ पाई। कई लोगों का मानना है कि माजिद उस समय के अजित-दिलीप गैंग से जुड़ा हुआ था, जो करीम लाला के प्रभाव वाले गिरोहों के खिलाफ सक्रिय था। तीसरे नंबर पर आता है मान्या सुर्वे का एनकाउंटर, जिसने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। इस मुठभेड़ को अंजाम देने वाली टीम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इशाक बागवान भी शामिल थे। बागवान का दावा रहा है कि मान्या सुर्वे का एनकाउंटर ही पहला था, लेकिन जब उन्हें १९८० में हुए लुइस डिसूजा के एनकाउंटर के बारे में बताया गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। इस पूरे विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि फिल्मों और वास्तविक घटनाओं के बीच काफी अंतर रहा है। उदाहरण के लिए, फिल्म ‘शूट आउट एट वडाला’ में मान्या सुर्वे को बड़े अंडरवर्ल्ड नेटवर्क से जोड़कर दिखाया गया, जबकि बागवान के अनुसार, वह न तो दाऊद इब्राहिम और न ही शब्बीर इब्राहिम से कभी मिला था। वह मुख्य रूप से एक लुटेरा (रॉबर) था, जो स्वतंत्र रूप से अपराध करता था। इसी तरह फिल्म में दिखाए गए कई घटनाक्रम वास्तविकता से मेल नहीं खाते। बागवान के अनुसार, शब्बीर इब्राहिम की हत्या में मान्या सुर्वे का कोई हाथ नहीं था, बल्कि यह अपराध आमिरजादा खान और आलमजेब खान ने अपने साथियों के साथ मिलकर किया था। निष्कर्षत:, यदि तथ्यों और तिथियों के आधार पर देखा जाए, तो मुंबई का पहला पुलिस एनकाउंटर १९८० में लुइस जोसेफ डिसूजा का था, उसके बाद १९८१ में माजिद और फिर १९८२ में मान्या सुर्वे का नंबर आता है। लेकिन लोकप्रियता, मीडिया कवरेज और फिल्मों के प्रभाव के कारण मान्या सुर्वे का एनकाउंटर ही सबसे ज्यादा चर्चित और ‘पहला’ माना जाता रहा है। यही कारण है कि मुंबई अंडरवर्ल्ड का यह अध्याय आज भी एक रहस्य और बहस का विषय बना हुआ है।

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