सामना संवाददाता / मुंबई
भाजपा सरकार ही मुंबई और देश को बेचना चाहती है। आपको पूरी तरह खत्म करने की साजिश रची जा रही है। आपकी जमीन और आपकी भाषा खत्म हुई तो आप भी खत्म हो जाएंगे। लेकिन अगर महानगरपालिका हमारे हाथ में रही तो वे कुछ भी नहीं कर पाएंगे। तब वे अडानी को जमीन भी नहीं दे पाएंगे। यह आखिरी मौका है। अब चूके तो सब कुछ खो बैठोगे। इस तरह का जोरदार हमला मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने कल किया। इसी के साथ ही उन्होंने आह्वान किया कि स्थानीय लोगों को मुंबई और महाराष्ट्र के लिए एकजुट होना होगा।
दादर स्थित शिवतीर्थ में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे की संयुक्त सभा संपन्न हुई। इस सभा में राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे देश को बेचने की साजिश चल रही है। राज ठाकरे ने कहा कि मैं २० साल बाद पहली बार युति कर रहा हूं। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ लोगों को टिकट मिले, कुछ को नहीं मिल सके। कुछ लोगों ने सोचा कि वे दूसरे दलों में जाएं। ये बातें राजनीति में होती हैं और ये सभी पैâसले हमारे हाथ में नहीं थे। इस बीच जो लोग नाराज हुए हैं, उनसे मैं दिल से माफी मांगता हूं। अभी जो इधर-उधर हैं, वे कहां जाएंगे यह पता नहीं, लेकिन जो चले गए हैं, वे वापस जरूर आएंगे। राज ठाकरे ने आगे कहा कि मैं और उद्धव एक साथ आए हैं, क्योंकि मुंबई पर बड़ा संकट आ गया है। मैं कई वर्षों से यह बता रहा हूं कि किस तरह से एक सोची-समझी चाल चली जा रही है। वर्ष २०२४ के बाद यानी विधानसभा चुनाव के बाद इस सरकार को खुली छूट मिल गई। ये अब जो चाहें, जैसा चाहें, करने लगे हैं। इनमें इतनी हिम्मत कहां से आई? किसी से पूछना नहीं, किसी की परवाह नहीं। पैसा फेंको और जनता को खरीद लो। यह आत्मविश्वास इन्हें कहां से मिला? उन्होंने कहा कि कांग्रेस की भी सत्ता रही है, लेकिन वे जनता से डरते थे। हालांकि, अब डर जैसी कोई चीज ही नहीं रही।
मतदान अधिकार छीना
राज ठाकरे ने जोरदार हमला करते हुए कहा कि इस सरकार का अहंकार कहां चला गया है? अकोट में भाजपा ने एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया। बदलापुर में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया। ६६ लोग निर्विरोध चुने गए। वहां लोगों का मतदान अधिकार ही छीन लिया गया। उन्होंने कहा कि दुख इस बात का है कि लोग बिक रहे हैं। राज ठाकरे ने आगे कहा कि तुलजापुर में ड्रग रैकेट से जुड़े विनोद गंगणे को भाजपा ने टिकट दिया। बलात्कार के आरोपी तुषार आपटे को नगरसेवक बनाया गया। नाबालिग बच्चियों से बलात्कार के आरोपी को भी नगरसेवक बनाया गया। यह हिम्मत कहां से आती है? जब गलत और टेढ़े-मेढ़े तरीकों से चुनाव जीतने की तकनीक समझ में आ जाती है, तब घमंड और मस्ती आ जाती है। पूरी मुंबई, महाराष्ट्र और देश को बेचने के लिए निकल पड़े हैं।
आंबेडकर ने दी थी खतरे की चेतावनी
अपने आक्रामक भाषण में राज ठाकरे ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के लेखन का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर ने लिखा था कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे विशाल राज्य बनाकर तथा राज्य पुनर्गठन के माध्यम से असमानता पैदा की जा रही है। संविधान समिति के काम के दौरान यह चर्चा कांग्रेस की बैठकों में हुई थी। हिंदी भाषा को लेकर तीखी बहस हुई थी। जब मतदान कराया गया तो ७८ बनाम ७८ वोट पड़े। बाबासाहेब को आशंका थी कि भविष्य में उत्तर प्रदेश और बिहार अत्यधिक शक्तिशाली हो जाएंगे। तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों को भी यही डर था। यह स्थिति राष्ट्रीय एकता के लिए घातक होगी, ऐसा बाबासाहेब ने चेताया था।
सत्ता इनके सिर पर चढ़ गई है
राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई खरीदी नहीं जा सकती इसलिए बेतहाशा पैसा फेंककर जमीन खरीदी जा रही है। सत्ता इनके सिर पर चढ़ गई है। उन्होंने कहा कि पहले भूगोल समझिए, वाढ़वन बंदरगाह के पास ही गुजरात है। मुंबई को गुजरात से जोड़ना इनके दिमाग में पहले से है। पहले पालघर, फिर वाढ़वन और फिर मुंबई यह एक लंबी योजना है। राज ठाकरे ने कहा कि कोंकण पट्टी खाली कराई जा रही है। जमीनें खरीदी जा रही हैं। बुलेट ट्रेन का मैंने तब भी विरोध किया था और आज भी कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि अमदाबाद में नया शहर बसाया जा रहा है, जो मुंबई से डेढ़ गुना बड़ा है।
पूरे राज्य में अडानी का जाल
राज ठाकरे ने एक बार फिर ‘लाव रे तो वीडियो’ कहते हुए गौतम अडानी के प्रोजेक्ट्स की सूची और आंकड़े दिखाए। उन्होंने कहा कि वर्ष २०१४ में महाराष्ट्र में अडानी का केवल एक प्रोजेक्ट था, जबकि आज पूरे राज्य में उनका जाल पैâला है। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अडानी के प्रोजेक्ट्स में कितनी वृद्धि हुई, यह उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया। राज ठाकरे ने कहा कि गौतम अडानी कभी सीमेंट उद्योग में नहीं थे। लेकिन आज उनकी कंपनी देश की दूसरी सबसे बड़ी सीमेंट उत्पादक बन गई है। मुंबई हवाई अड्डे की जमीन बेचने की साजिश का आरोप भी उन्होंने लगाया। उन्होंने कहा कि यदि एक ही उद्योगपति को सारे अधिकार सौंप दिए गए तो कल बिजली के दाम भी वही तय करेगा।
२०२४ के विधानसभा चुनाव के बाद इस सरकार को खुली छूट मिल गई। ये अब जो चाहें, जैसा चाहें, करने लगे हैं। इनमें इतनी हिम्मत कहां से आई? किसी से पूछना नहीं, किसी की परवाह नहीं। पैसा फेंको और जनता को खरीद लो।
