" /> गलती…!

गलती…!

गलती कौन नहीं करता? जो काम करेगा वही गलती भी करेगा और जो काम ही नहीं करेगा, वो क्या खाक गलती करेगा। इंसान चाहे छोटा हो या बड़ा, हर एक से गलती होती ही है। कुछ अपनी गलती मान लेते हैं, कुछ नहीं मानते और कुछ गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ जाते हैं। फिल्म इंडस्ट्री में भी एक ऐसा ही वाकया घटित हुआ जब एक मशहूर फिल्म की मेकिंग के दौरान फिल्म के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर ने फिल्म के एक मशहूर गाने को शूट कर लिया। गाने में किसी एक गायक की नहीं, बल्कि दो गायक और दो गायिकाओं यानी चार पार्श्व गायकों की आवाज थी। लेकिन गीत की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर साहब ने चारों आवाजों को अलग-अलग वैâरेक्टर्स पर फिल्माने की बजाय दो आवाजों को एक ही वैâरेक्टर पर फिल्मा दिया। गाने की शूटिंग कंप्लीट हो जाने के बाद जब डायरेक्टर ने फिल्म के संगीतकार को फिल्माए हुए गाने का रश प्रिंट दिखाया तो संगीतकार ने डायरेक्टर को उनकी गलती बताते हुए गाने को दोबारा री-शूट करने के लिए कहा। लेकिन डायरेक्टर ने गीत को दोबारा फिल्माने से इनकार कर दिया।
रमजान खान के नाम से १९०६ में बड़ौदा के करीब एक छोटे से गांव में पैदा हुए महबूब खान डायरेक्टर बनने से पहले एक्टर बनना चाहते थे। कुछ बनने की चाह लिए १६ वर्ष की उम्र में वे घर से भाग गए थे लेकिन पुलिसकर्मी पिता उन्हें पकड़कर घर ले आए और वे दोबारा घर से न भागें इसलिए पड़ोस के गांव की एक लड़की से छोटी उम्र में जबरदस्ती उनका ब्याह रचा दिया। २३ साल की उम्र में अपनी जेब में मात्र ३ रुपए लेकर तीन बच्चों के पिता महबूब खान सपनों की नगरी मुंबई आ गए। मुंबई आने के बाद बतौर एक्स्ट्रा उन्होंने कई छोटे-मोटे रोल इंपीरियल कंपनी के लिए किए। १९३१ में अर्देशीर ईरानी उन्हें अपनी फिल्म ‘आलमआरा’ में लीड रोल देना चाहते थे लेकिन ये रोल महबूब खान की बजाय मास्टर विट्ठल ने निभाया। अपने करियर का पहला बड़ा ब्रेक उन्हें १९३५ में फिल्म ‘अल हिलाल’ में मिला। १९४० में महबूब खान ने फिल्म ‘औरत’ डायरेक्ट की। फिल्म में प्रमुख भूमिका सरदार अख्तर ने निभाई थी, जिनसे आगे चलकर महबूब खान ने दूसरा विवाह रचा लिया। १९४२ में ‘महबूब प्रोडक्शन’ की नींव रखते हुए महबूब खान ने अपने बैनर तले फिल्म ‘रोटी’ का निर्माण किया। इसके बाद उन्होंने फिल्म ‘अंदाज’ (१९४९), ‘आन’ (१९५२), ‘अमर’ (१९५४) जैसी एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्में बनार्इं और १९५४ में उन्होंने मुंबई में ‘महबूब स्टूडियो’ की स्थापना की। १९५७ में भारतीय सिनेमा में मील का पत्थर कही जानेवाली फिल्म ‘मदर इंडिया’ का निर्माण महबूब खान ने किया, जो उनकी ही फिल्म ‘औरत’ का रीमेक थी। फिल्म में नरगिस, राजकुमार, सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार, कुमकुम, कन्हैयालाल जैसे बेहतरीन कलाकारों ने अपनी अदाकारी का जौहर दिखाया था।
फिल्म ‘मदर इंडिया’ के निर्माण के दौरान फिल्म के गीतों पर काम चल रहा था। फिल्म के गीतों को मधुर धुनों से संगीतकार नौशाद सजा रहे थे। फिल्म के एक गीत ‘दुख भरे दिन बीते रे भैया…’ को नौशाद साहब ने फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से चार पार्श्वगायकों आशा भोसले, शमशाद बेगम, मोहम्मद रफी और मन्ना डे से गवा लिया था। फिल्म की शूटिंग के दौरान महबूब खान ने दूसरे अन्य गीतों के साथ ही इस गीत को भी शूट कर लिया। गाने की शूटिंग खत्म होने के बाद जब फिल्म के रशेज आए तो महबूब खान ने नौशाद साहब को गाने का रश प्रिंट देखने के लिए बुलाया की वो आकर देखें कि उन्होंने नौशाद साहब द्वारा संगीतबद्ध किए गीत को कितने बेहतरीन ढंग से फिल्माया है। महबूब खान के बुलावे पर नौशाद साहब महबूब खान के पास पहुंचे। यहां-वहां की बातों के बाद महबूब खान ने नौशाद को गाने का रश प्रिंट दिखाया और नौशाद साहब बड़ी तल्लीनता से महबूब खान द्वारा फिल्माए गए गीत ‘दुख भरे दिन बीते रे भैया…’ को देखने लगे। कोरस खत्म होते ही जैसे ही गीत की शुरुआत मुख्य आवाजों में हुई नौशाद साहब ने उसे देखते ही अपना सिर पकड़ लिया। नौशाद साहब ने महबूब खान से कहा, ‘आपने बहुत बड़ी गड़बड़ कर दी।’ नौशाद की बात सुनकर महबूब खान चौंककर बोले, ‘क्या गड़बड़ कर दी मैंने?’ अब नौशाद साहब बोले, ‘ये आशा भोसले की आवाज है, ये शमशाद बेगम की आवाज है, ये मोहम्मद रफी की आवाज है और ये मन्ना डे की आवाज है। आपने इसे एक ही वैâरेक्टर पर फिल्मा लिया।’ अब आगे नौशाद साहब बोले, ‘देख रे घटा घिर के आई’ ये आवाज आशा भोसले की है, ‘रस भर-भर लाई’ ये शमशाद बेगम की, दोनों आवाजें एक के बाद एक फौरन आती हैं। इन दोनों ही आवाजों को आपने नरगिस पर फिल्मा लिया है। राजकुमार पर आपने फिल्माया रफी की आवाज में ‘छेड़ ले गोरी मन वीणा’ फौरन मन्ना डे साहब पिकअप करते हैं ‘रिमझिम रुत छाई’ ये अलग आवाजें हैं। इसे आपने एक ही वैâरेक्टर पर फिल्मा लिया। नौशाद की बात सुनकर महबूब खान के होश उड़ गए। खैर, नौशाद ने दोबारा गाने को शूट करने के लिए कहा। नौशाद की बात सुनकर अब महबूब खान बोले, ‘नौशाद भाई, मैंने ढेर सारा पैसा खर्च करने के साथ ही इस गाने की शूटिंग में बहुत मेहनत की है। अब दोबारा इस गाने को मैं पिक्चराइज नहीं करूंगा।’ महबूब साहब के मुंह से ये बात सुनकर नौशाद साहब बोले, ‘महबूब साहब, आपका नाम काफी बड़ा है। लोग हंसेंगे कि महबूब साहब जैसे डायरेक्टर ने इतनी बड़ी गलती की।’ नौशाद साहब की बात सुन महबूब खान सोच में पड़ गए और बोले, ‘नौशाद भाई, आपका गाना इतना पावरफुल है कि पब्लिक का ध्यान मेरी इस गलती की ओर जाएगा ही नहीं। आप मेरे इस अल्फाज को नोट कर लो, ऐसा ही होगा।’ आखिरकार, ‘मदर इंडिया’ की रिलीज के बाद महबूब खान ने जैसा कहा था ठीक वैसा ही हुआ। फिल्म और फिल्म के गीतों का जादू लोगों के सिर चढ़कर ऐसा बोला कि लोगों का ध्यान महबूब खान की इस गलती की ओर गया ही नहीं!