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सवाल हमारे, जवाब आपके ?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के भाव में काफी गिरावट आ चुकी है। इस साल के उच्चतम १३९ डॉलर प्रति बैरल से घटकर अब यह ८१ डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इसके बावजूद मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल के भाव में कमी नहीं कर रही है। क्या यह उचित है?
 जनता मूर्ख नहीं है
यह सरकार सिर्फ लूटने का काम कर रही है। वैश्विक मंदी का विलाप कर जनता को मूर्ख बनाया जा रहा है। लेकिन जनता मूर्ख नहीं है, वह सब समझती है। बस उसे समय का इंतजार है। इसका खामियाजा सरकार को आज नहीं तो कल भुगतना ही होगा।
-संतोष जैसवाल, ठाणे

 सरकार मनमानी कर रही
जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल के भाव कम हुए हैं तो भी खुदरा मूल्यों में कमी न करना गलत है। केंद्र सरकार मनमानी कर रही है। जनता के हित में सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए।
-प्रमोद पांडेय, अंबरनाथ

 तेल की कीमत कम होनी चाहिए
जब क्रूड ऑयल की कीमत कम हुई है तो आम जनता को भी तेल कम कीमत पर मिलना चाहिए। मगर मोदी सरकार मनमानी पर उतरी हुई है। ऐसे में जनता काफी परेशान हो रही है।
-हर्षिता गौड़, कल्याण

 यह नीति ठीक नहीं
केंद्र सरकार जनता का खून चूस रही है। जब क्रूड ऑयल महंगा होता है तब वह भी रोजाना दाम बढ़ाती रहती है पर जब वहां भाव कम होते हैं तो सरकार भाव कम नहीं करती। सरकार की यह नीति ठीक नहीं है।
-राजेश कुमार, अंधेरी

 महंगाई पर काबू नहीं
देश में रोजाना महंगाई बढ़ रही है पर केंद्र सरकार का इस महंगाई पर कोई काबू नजर नहीं आ रहा। खासकर तब तो हालत और भी खराब नजर आते हैं जब उसे कम किया जा सकता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव कम हो गए हैं तो सरकार को पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम कर देनी चाहिए ताकि जनता को राहत मिल सके।
-सूरज सिंह, बोरीवली

 यही हैं अच्छे दिन
भाजपा ने देश की जनता से अच्छे दिन लाने का वादा किया था। अब जब ८ वर्षों से वह केंद्र की सत्ता पर काबिज है तो महंगाई को नियंत्रित नहीं कर पा रही है। पेट्रोल-डीजल का महंगाई से सीधा संबंध है। इसकी जब कीमतें बढ़ती हैं तो महंगाई भी बढ़ती है। पर सरकार को यह बात समझ में नहीं पाती।
-रेणु कुमारी, ठाणे

आज का सवाल?
हरियाणा में जिला परिषद के चुनावों में सत्ताधारी भाजपा को जोरदार झटका लगा है। कुल ४११ सीटों में से भाजपा को सिर्फ २२ सीटें मिली हैं जबकि आम आदमी पार्टी को १५सीटें मिली हैं। मगर आश्चर्य की बात है कि निर्दलीय उम्मीदवारों ने ३५० सीटें जीत ली हैं। कहीं ये भाजपा राज के खात्मे का संकेत तो नहीं है?
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